जरूरतमंदों की सहायता से गौरवांवित होंगे पूर्वज: रमेश भाई जी
यदि आप अपने मन में सेवा का भाव रखते है, समाज के जरूरतमंदों की सहायता करते है तो आप अपने साथ-साथ अपने पूर्वजों को भी गौरवांवित करते है। आज का समय विज्ञान और अध्यात्म को साथ लेकर चलने का समय है, इसीलिए जितनी जरुरी शिक्षा है, उतने ही जरुरी संस्कार भी।

- आचार्य बिनोवा के संस्कारों को जीवन में उतारने की जरूरत: प्रो. विनय पाठक
कानपुर,अमन यात्रा । यदि आप अपने मन में सेवा का भाव रखते है, समाज के जरूरतमंदों की सहायता करते है तो आप अपने साथ-साथ अपने पूर्वजों को भी गौरवांवित करते है। आज का समय विज्ञान और अध्यात्म को साथ लेकर चलने का समय है, इसीलिए जितनी जरुरी शिक्षा है, उतने ही जरुरी संस्कार भी। यह कहना है आचार्य विनोवा भावे के प्रखर अनुयायी रमेश भाईजी का, जो शनिवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के
की अुनयायी विमला ने लोगो को परिवार तक सीमित न रहकर, देश को ऊचांइयों तक ले अकादमिक भवन में आयोजित व्याख्यान में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने विनोबा भावे के प्रेरक व्यक्तित्व का वर्णन करते हुए उनके जीवन दर्शन का समझाया। उन्होंने अपने जीवन से जुड़े कई अनुभव साझा कारते हुए बताया कि एक मनुष्य जीवनभर कुछ न कुछ सीखता रहता है और इसी से सीख लेकर उसे अपने जीवन में सुधार करते हुए जनकल्याण के कार्यों में भी अपना योगदान देते रहना चाहिए।
कार्यक्रम में कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को आचार्य विनोबा भावे और महात्मा गांधी जैसे महापुरुषों के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय को देखते हुए छात्रों के मन में दूसरों के लिए सेवाभाव पैदा करना बेहद आवश्यक है, जिससे हम अपने बुनियादी संस्कारों से जुड़े रह सके। प्रो. पाठक ने वि.वि. की एन.एस.एस और एन.सी.सी के छात्रों को रमेश भाईजी के साथ जुड़कर के समाज कल्याण के कार्यों में अपना योगदान देने की सलाह दी। विनोबा भावे जाने में अपना योगदान देने की सलाह दी।
कार्यक्रम का संचालन प्रो. संजय स्वर्णकार ने किया। इस अवसर पर प्रति कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी, कुलसचिव डॉ. अनिल कुमार यादव, सीडीसी निदेशक डॉ. आर.के द्विवेदी, कार्यक्रम समन्वयक डॉ. आर.एन. कटियार, डॉ. प्रवीण कटियार, डॉ. शिल्पा कायस्थ, डॉ. शशिकांत त्रिपाठी, डॉ. अनुराधा कालानी, डॉ. निशा शर्मा, डॉ. अंकित त्रिवेदी, डॉ. पतंजलि मिश्रा, डॉ. अंजू दीक्षित, डॉ. प्रवीण भाई पटेल, डॉ. दिवाकर अवस्थी, डॉ. पंकज त्रिवेदी, डॉ. रश्मि गोरे, डॉ. योगेंद्र पांडेय आदि मौजूद रहे।
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