कई बार हो चुका है धरना-प्रदर्शन

मालूम हो कि केंद्र सरकार की बैंकों के निजीकरण के खिलाफ बैंक कर्मचारी समय समय पर धरना प्रदर्शन करते रहे हैं। बैंक कर्मचारियों का मानना है कि सरकार की तरफ से उनकी मांगों पर कोई विचार नहीं किया जा रहा है। इसलिए हड़ताल करना अब मजबूरी हो गया है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन का कहना है कि निजीकरण समस्‍या को बढ़ाने वाला कदम है। अधिकतर घोटाले निजी बैंकों में हुए हैं, बावजूद इसके सरकार निजीकरण करने पर आमादा है। इसका लगातार विरोध हो रहा है।

सरकार से नहीं बनीं बात

केंद्रीय श्रमायुक्त की ओर से आयोजित बैठक में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच वार्ता का भी कोई सकारात्मक हल नहीं निकला। ऐसे में निजीकरण के खिलाफ 15 व 16 मार्च को प्रस्तावित बैंकों की हड़ताल होगी। पूर्वांचल बैंक इंप्लाइज यूनियन के महासचिव शिवम श्रीवास्तव ने कहा कि सभी बैंकों के अलावा ग्रामीण बैंक भी बंद रहेंगे। कहीं पर कोई काम नहीं होगा। सभी बैंकों में उस दिन ताले बंद रहेंगे। हमने सरकार के प्रतिनिधि से अपनी बात कह दी है। अपनी मांगों के समर्थन में तर्क भी दिया है, बावजूद इसके कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ऐसे में अब कोई चारा नहीं बचता है। अब केवल हड़ताल की एक मात्र उपाय रह गया है।

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के प्रतिनिधियों का कहना है कि अभी तक हम लोग सिर्फ धरना-प्रदर्शन से काम चला रहे थे। सरकार खुद हड़ताल कराने के लिए मजबूर कर रही है। हमारी मांगें न स्‍वीकार कर सरकार ने ही हड़ताल के लिए उकसाया है। ऐसे में हड़ताल होगा। उनका कहना है कि हड़ताल के दिन किस को क्‍या जिम्‍मेदारी दी जाएगी, इस पर मंथन चल रहा है। हड़ताल को सफल बनाने के लिए सभी कर्मचारी एकजुट हैं।