कांग्रेस की उत्तर प्रदेश प्रभारी ने कहा, ”खबरों के अनुसार पीड़ित परिवार को नजरबंद कर दिया गया है. यह न्याय के कार्य में बाधा डालने वाला काम है. आखिर परिवार को नजरबंद करके सरकार को क्या हासिल होगा ?” प्रियंका ने कहा, ”यूपी सरकार से निवेदन है कि परिवार की पूरी बात सुनें और त्वरित प्रभाव से तीसरी बच्ची को इलाज के लिए दिल्ली शिफ्ट किया जाए.”
गौरतलब है कि उन्नाव जिले के असोहा इलाके के बबुरहा गांव के बाहर बुधवार को दलित समुदाय की तीन लड़कियां बेसुध मिलीं. अस्पताल ले जाने पर उनमें से दो को मृत घोषित कर दिया गया.
पुलिस अधीक्षक आनंद कुलकर्णी ने बताया कि बबुरहा गांव में एक ही परिवार की 15, 14 और 16 साल की तीन लड़कियां दोपहर करीब तीन बजे जानवरों के लिए चारा लेने घर से निकली थीं. देर शाम तक वापस ना आने पर परिजनों ने उनकी तलाश की तो वे तीनों गांव के बाहर खेत में बेसुध पड़ी मिलीं. वे एक दुपट्टे से बंधी हुई थीं. उन्होंने कहा कि दो लड़कियों की मौत हो गई और तीसरी लड़की को गंभीर हालत में उन्नाव जिला अस्पताल लाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे कानपुर रेफर कर दिया गया.
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