उत्तरप्रदेश
बेसिक विद्यालयों में फेस रिकग्निशन आधारित अटेंडेंस लागू करने के निर्देश से शिक्षकों में आक्रोश
परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों की फेस रिकग्निशन आधारित बॉयोमीट्रिक उपस्थिति लागू करने के निर्देश महानिदेशक कंचन वर्मा द्वारा 12 दिसंबर को दिए गए। पहले चरण में छह जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में 27 दिसंबर से इसे शुरू किया जाएगा।

- शिक्षकों का कहना है ना झुकेंगे ना रुकेंगे, ऑनलाइन अटेंडेंस स्वीकार ना हम करेंगे
राजेश कटियार , लखनऊ/कानपुर देहात। परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों की फेस रिकग्निशन आधारित बॉयोमीट्रिक उपस्थिति लागू करने के निर्देश महानिदेशक कंचन वर्मा द्वारा 12 दिसंबर को दिए गए। पहले चरण में छह जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में 27 दिसंबर से इसे शुरू किया जाएगा। छात्रों की उपस्थिति हर माह की 27 तारीख (महीने में एक बार) लगेगी। शिक्षक और कर्मचारियों के लिए व्यवस्था कब से शुरू होगी फिलहाल इसकी तारीख स्पष्ट नहीं की गई है। पूर्व महानिदेशक विजय किरन आनंद की ओर से शुरू की गई पहल पर नई महानिदेशक कंचन वर्मा ने भी मुहर लगाई। सीतापुर, रायबरेली, उन्नाव, हरदोई, लखीमपुर खीरी व बाराबंकी के बीएसए व बीईओ को दिए गए निर्देश में कहा गया है कि विद्यालयों में दो दो टैबलेट दिए जा रहे हैं। वितरण पूरा होने पर सभी विद्यालयों में बॉयोमीट्रिक अटेंडेंस शुरू होगी। इसके लिए यूजर मैनुवल भी दिया गया है। शिक्षकों व कर्मचारियों की उपस्थिति विद्यालय खुलने व बंद होने के समय लगेगी। पायलट प्रोजेक्ट के दौरान उपस्थिति कभी भी लग सकेगी। आदेश के मुताबिक विद्यार्थियों की उपस्थिति पहली बार 27 दिसंबर को फिर हर महीने की 27 तारीख को लगेगी। 27 को छुट्टी होने पर अगले कार्य दिवस में लगेगी।
वहीं शिक्षकों का कहना है कि इस अव्यवहारिक आदेश को हम कदापि स्वीकार नहीं करेंगे। न हम आँखें झपकायेंगे और न ही ओंठ हिलाएंगे। यदि हम कुछ करेंगे तो मात्र टैबलेट का विरोध करेंगे। जब तक हमारी माँगें नहीं पूरी की जाएंगी हम टैबलेट से उपस्थिति नहीं देंगे। यदि महानिदेशक कार्यालय हमारे शोषण हेतु प्रतिबद्ध है तो हम उस शोषण का वैचारिक विरोध करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका कहना है कि जैसे मछुवारा मछली को फँसाने के लिए लोहे के कांटे में कोई चारा लगा देता है मछली बेचारी उसे चारा समझकर खाने लगती है और फँस जाती है। मछुवारा और मछली के खेल का अंत मछली की मौत से होता है। उसी तरह हम लोगों को जो आदेश दिया गया है कि दिन में एक बार उपस्थिति देनी है।
यदि आप सब उपस्थिति देने लगे तो कल को आदेश आएगा कि दिन में दो बार उपस्थिति अनिवार्य रहेगी और परसों ही आदेश आयेगा कि सुबह 8.45 पर और शाम 3.30 पर भी उपस्थिति अनिवार्यतः देनी ही पड़ेगी। ध्यान रखिएगा हम लगभग पाँच लाख हैं और पाँच लाख शिक्षकों को न तो बर्खास्त किया जा सकता है और न ही वेतन रोका जा सकता है। हम एक हैं और एकमत से टैबलेट का प्रतिकार करते हैं क्योंकि शिकारी, शिकार का तरकीब बदल रहा है अपना शिकार नहीं।
जब सरकार शिक्षकों को कामचोर समझती है और उनकी उपस्थिति विद्यालय में सुबह 8.30 बजे सुनिश्चित करना चाहती है तो फिर अब दिन में किसी भी वक्त हाजिरी देने की हालिया लॉलीपॉप व्यवस्था क्यों दी जा रही है। समझदार को इशारा काफी है सावधानी हटी दुर्घटना घटी।पहले विभागीय अधिकारियों द्वारा ससुविधाएं व्यवस्थाएं उपलब्ध करवाई जाएं और अन्य सभी मांगे पूरी हों इससे पहले हम सभी इस अव्यवहारिक व्यवस्था को स्वीकार नहीं करेंगे।
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