सम्पादकीय
-
चुनाव आयोग की स्वायत्तता की दुर्दशा का ज़िम्मेदार कौन?
दिसंबर, 1990 से दिसंबर, 1996 तक अपने पद पर रहे देश के दसवें मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन निर्वाचन आयोग…
Read More » -
बहुजन से जातियों के कुनबे तक : कांशीराम का सपना क्यों बिखर गया?
राजस्थान के ताजा स्थानीय निकाय चुनावों में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को 19 सीटें मिली हैं। पिछली बार 24 थीं।…
Read More » -
जब चुनावी लोकतंत्र खुद ही सवालों के घेरे में आ जाए
पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजिनगर उपचुनावों के इर्द-गिर्द जो हो रहा है, वह आम राजनीतिक दुश्मनी से कहीं ज़्यादा…
Read More » -
फटा ढोल, खुली पोल!
पुरानी कहावत है — बंद मुट्ठी लाख की, खुल गयी तो खाक की! नरेंद्र मोदी के छिहत्तर वर्ष पूरे होने…
Read More » -
पेंगुइन की दक्षिणपंथी बेशर्मी
पेंगुइन रैंडम हाउस (पीआरएच) दुनिया के सबसे बड़े प्रकाशकों में से एक है। पीआरएच का एक मुद्रक अमेरिका में सोनिया…
Read More » -
ब्रिक्स : विरोधाभासों के बीच उम्मीदें
नई दिल्ली में 12-13 सितंबर 2026 को हुए 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में 140-बिंदुओं का एक घोषणा पत्र तैयार किया…
Read More » -
ट्रेलर ख़तम, अमावस्या के भेड़ियों की फिलिम शुरू
फाइनली, ट्रेलर ख़त्म हो गया और फिल्म शुरू हो गयी है। निर्माता, निर्देशक और फाइनेंसर अभी तुरंतई रिलीज़ करना तो…
Read More » -
भागवत कथा : न विदेश ने सुनी, न देश ने!
आरएसएस प्रमुख, मोहन भागवत क्या अपने करीब दस दिन के अमेरिका-कनाडा-इंग्लैंड दौरे में, आरएसएस की एक सांप्रदायिक, फासीवादी संगठन की…
Read More » -
खून के छींटें ब्लैकबोर्ड पर!
बांकुरा ज़िले के इंदस ब्लॉक में स्थित करिशुंडा गाँव में हाल ही में हुई हिंसक झड़प ने पूरे पश्चिम बंगाल…
Read More » -
आत्मनिर्भरता के नाम पर लूट-खसोट
हर सौ रुपये के कर्ज़ के बदले सिर्फ़ तीन पैसे चुकाइए। संक्षेप में कहें तो, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी)…
Read More »









