कानपुर, अमन यात्रा । छत्रपति शाहूजी महाराज विवि के स्वर्णिम इतिहास में ऐसे कई छात्र-छात्राएं रहे हैं, जिन्होंने भारत सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर ही आसीन होकर विवि का नाम नहीं रोशन किया, बल्कि अमेरिका तक देश का झंडा बुलंद किया। मूलरूप से फर्रुखाबाद की रहने वाली और वहां के एनएकेपी गल्र्स कालेज से पढ़ीं रेणु खाटोर ने अमेरिका स्थित ह्यूस्टन विवि का अध्यक्ष पद संभाला था। वह पहली भारतीय महिला थीं, जिन्होंने यह महत्वपूर्ण पद हासिल किया।
कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने बताया कि विवि के छात्र-छात्राएं देश में भी राजनीति, रंगमच, कला, साहित्य, प्रशासन समेत तमाम महत्वपूर्ण पदों पर आसीन रहे हैं। खुद राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द विवि के छात्र हैं। वहीं एल्युमिनाइ एसोसिएशन के सचिव डा. सिधांशु ने बताया कि कर्नाटक राज्य के 14वें राज्यपाल रहे पद्मविभूषण से सम्मानित टीएन चतुर्वेदी भी विवि के छात्र थे। इसके अलावा पद्मश्री से सम्मानित हुए मशहूर कवि कन्हैयालाल नंदन, गोपाल दास नीरज, श्याम नरायण पांडेय ने भी विवि के अधीन महाविद्यालयों से शिक्षा हासिल की थी। एयर मार्शल आरसी बाजपेई, एडमिरल विष्णु भागवत, लोकसभा सदस्य रहे श्यामा चरण गुप्ता, दिल्ली नगर निगम के पूर्व मेयर रहे आदेश कुमार गुप्ता, सेंट्रल विजिलेंस कमिश्नर रहे संजय कोठारी, गायक अभिजीत भट्टाचार्य, शिक्षाविद व विज्ञानी राकेश भटनागर भी विवि के ही छात्र रहे।
डा. सिधांशु ने बताया कि विवि की एल्युमिनाइ एसोसिएशन से जुड़े सदस्य किसी न किसी रूप में संस्थान के कार्यों में अपना सहयोग प्रदान करते हैं। विवि के विद्यार्थियों में रोजगार, नवाचार, उद्यमशीलता विकसित करने के लिए एल्युमिनाइ एसोसिएशन अपने सदस्यों की सहायता लेती है। पहली बार एल्युमिनाइ एसोसिएशन ने ही राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द को विवि में आमंत्रित किया था। विवि की स्थापना दिवस पर पूर्व छात्र भी आनलाइन जुड़ेंगे और विद्यार्थियों को अपने अनुभव बताएंगे।
लाजपत भवन में हुआ था अखिल भारतीय कुलपति सम्मेलन : बात सन 1980 के आसपास की है। ये वो दौर था जब छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय को दुनिया भर में कानपुर यूनिवर्सिटी के नाम से जाना जाता था। उस समय विवि के पास आधारभूत संरचनाएं नहीं थीं, लेकिन इसके प्रभाव में कोई कमी नहीं थी। संसाधनों के तंगहाली के बीच विवि की इसी बेहतर छवि का एक वाक्या यह सामने आया कि अचानक दिल्ली में अखिल भारतीय स्तर पर कुलपति सम्मेलन कराने का जिक्र छिड़ा और यह तय किया गया कि सम्मेलन कानपुर में होना चाहिए। लिहाजा इसकी जिम्मेदारी विवि को दी गई।
स्थापना दिवस की तैयारियों में जुटे विवि के मीडिया सेल ने शनिवार को इतिहास के झरोखों से इस कार्यक्रम के आयोजन की जानकारी एकत्र की है। मीडिया सेल के मुताबिक केंद्र सरकार के कहने पर अखिल भारतीय कुलपति सम्मेलन यानी कि शिक्षा जगत के विद्वानों के सबसे बड़े कार्यक्रम के आयोजन की जिम्मेदारी विवि ने सहर्ष स्वीकार की। संसाधनों के लिहाज से विवि विकसित नहीं था और तकनीकी कौशल अपनाने की प्रकिया में चल रहा था। उस दौरान इमारत में केवल प्रशासनिक कार्य ही हुआ करते थे।
इसलिए तत्कालीन कुलपति डा. हेमलता स्वरूप के सामने बड़ा सवाल यह था कि यह आयोजन आखिर कहां और कैसे किया जाए? तब विश्वविद्यालय के अधिकारियों के बीच लंबी बैठकें हुई और इसके लिए लाजपत भवन का सभागार उपयुक्त माना गया। विवि के अधिकारियों ने सारी व्यवस्था संभाली और सम्मेलन के निमंत्रण पत्र छपवाए। डा. हेमलता की अगुवाई में विवि के सभी अधिकारियों व कर्मचारियों ने गजब की मेजबानी की और कार्यक्रम को भव्य बनाया। देश भर से मेहमान, तमाम विवि के कुलपति एकत्रित हुए। आलम यह था कि जो मेहमान सम्मेलन में आए, उन्होंने कानपुर से जाने के बाद भी इसे अपनी यादों में सहेज रखा।