
गांव के गलियारे
शहरों में वो अपनत्व कहां
जो हैं गांव के गलियारे में
सुकून हैं,नीम की छांव हैं l
सूखे गले को शीतल करे
ऐसे कुएं का अमृत हैं ।
मुखिया जी की चौपाल हैं तो काका की कहकसी भी हैं
गाय,भैंस की जुगल जोड़ी हैं l
तो, मोर की अदाओं से खेतों में छाई
खुमारी ही खुमारी है l
और चाची,काकी की रसोई गुलज़ार
चने और सरसों के साग से हैं l
आंगन के रंग जो हैं गेरुआ साहब!
उसमें चार चांद लगाए
गोबर की छाप हैं l
गांव की झलकियां
दिल में यादों के निशान हैं छोड़ती
गांव के गलियारे
अब, शहरों में कहां हैं मिलते.
स्नेहा सिंह (क्रिएटर)कानपुर, यूपी
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