अब प्रोफेशेनल्स भी कर सकेंगे आइआइटी कानपुर में पढ़ाई, चार ई-मास्टर्स प्रोग्राम लांच
आइआइटी ने सरकारी संस्थानों और निजी कंपनियों में कार्य कर रहे इंजीनियरों के ज्ञान, कौशल व जानकारी को बढ़ाने के लिए चार नए कोर्स लांच किए हैं। इसे ई-मास्टर्स प्रोग्राम नाम दिया गया है, जो एक से तीन साल में पूरा किया जा सकेगा। इसकी पढ़ाई एक जनवरी 2022 से शुरू होगी।

कानपुर, अमन यात्रा ब्यूरो । आइआइटी ने सरकारी संस्थानों और निजी कंपनियों में कार्य कर रहे इंजीनियरों के ज्ञान, कौशल व जानकारी को बढ़ाने के लिए चार नए कोर्स लांच किए हैं। इसे ई-मास्टर्स प्रोग्राम नाम दिया गया है, जो एक से तीन साल में पूरा किया जा सकेगा। इसकी पढ़ाई एक जनवरी 2022 से शुरू होगी।
निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने प्रेसवार्ता में बताया कि प्रोग्राम के अंतर्गत साइबर सिक्योरिटी, कम्यूनिकेशन सिस्टम, कमोडिटी मार्केट्स एंड रिस्क मैनेजमेंट और पावर सेक्टर रेगुलेशन के विषय शामिल हैं। पाठ्यक्रम में 60 क्रेडिट और 12 माड्यूल निर्धारित किए गए हैं। प्रवेश के लिए स्नातक में 55 फीसद अंक और कम से कम दो साल तक काम करने का अनुभव होना चाहिए। कोर्स की फीस आठ लाख रुपये है। समयावधि ज्यादा बढऩे पर फीस में बढ़ोतरी होगी। कोर्स पूरी तरह से आनलाइन होगा, जबकि 15 दिन संस्थान में आने का मौका मिलेगा। इच्छुक उम्मीदवार अधिक जानकारी या आवेदन करने के लिए वेबसाइट https://emasters.iitk.ac.in/ पर जा सकते हैं। साथ ही एडमिशन लेने के लिए भी वेबसाइट पर आवेदन कर सकते हैं ।
क्या है ई-मास्टर्स कार्यक्रमों संचार प्रणाली
आइआइटी कानपुर द्वारा संचालित चार ई-मास्टर्स कोर्स साइबर सुरक्षा; डेरिवेटिव बाजार और जोखिम प्रबंधन और विद्युत क्षेत्र विनियम, अर्थशास्त्र और प्रबंधन से संबंधित प्रवेश, शुल्क और अन्य सूचनाओं के विवरण आदि पर आधारित हैं। स्नातकोत्तर स्तर का कार्यक्रम हाइब्रिड डिलीवरी प्रारूप में पेश किया गया है। इसमें प्रतिभागी डिजिटल प्लेटफॉर्म ipearl.ai के माध्यम से संस्थान से अनुभवात्मक प्रारूप में ऑनलाइन प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे। इसके अलावा उन्हें फैकल्टी से मिलने और कैंपस लाइफ का भी अनुभव प्राप्त करने का मौका मिलेगा।
निदेशक ने कहा कि ई-मास्टर्स की लांचिंग के साथ डिग्री क्रेडेंशियल प्रोग्राम प्रदान करके एक और कदम आगे बढ़ाया है। यह कामकाजी प्रोफेसनल्स को संसाधनों और शिक्षा से अवगत कराएगा। जल्द ही इसमें और प्रोग्राम भी जोड़े जाएंगे। विश्वास है यह कि यह प्रोग्राम विशेषज्ञता को बढ़ाने में मदद करेगा और भारतीय डिजिटल परिवर्तन यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सहायक होगा।
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