1 नवंबर से मोबाइल स्क्रीन पर चमकेगा कॉलर का असली नाम: दूरसंचार विभाग का ऐतिहासिक फैसला, फर्जी कॉल और ठगी पर कड़ा प्रहार
दूरसंचार विभाग ने यूनिफाइड लाइसेंस नियमों में किया बड़ा संशोधन, अब नंबर के साथ दिखेगा सब्सक्राइबर रिकॉर्ड में दर्ज नाम
नई दिल्ली। फर्जी कॉल, स्पैम संदेशों और डिजिटल अरेस्ट जैसी साइबर ठगी पर पूरी तरह नकेल कसने के लिए केंद्र सरकार ने दूरसंचार व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव कर दिया है। dot calling line identification new rule के तहत संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग (DoT) ने कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन (CLI) के नियमों में बड़ा संशोधन करते हुए 1 नवंबर 2026 से नई व्यवस्था लागू करने का आदेश जारी किया है। इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद अब फोन आने पर स्क्रीन पर सिर्फ मोबाइल नंबर ही नहीं, बल्कि सिम धारक का असली नाम भी दिखाई देगा।
यूनिफाइड लाइसेंस एग्रीमेंट में हुआ औपचारिक संशोधन
दूरसंचार विभाग के लाइसेंसिंग पॉलिसी विंग द्वारा संचार भवन, नई दिल्ली से आदेश संख्या F. no. 20-1349/2024 AS-I (Unified License Amendment no. 01/ Licensing Policy / 2026) जारी किया गया है। निदेशक (लाइसेंसिंग पॉलिसी ऑथराइजेशन) विशाल श्रीवास्तव के हस्ताक्षरों से जारी इस आदेश के अनुसार, सभी यूनिफाइड लाइसेंसी टेलीकॉम ऑपरेटरों (जियो, एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया, बीएसएनएल आदि) के लिए 1 नवंबर 2026 से संशोधित परिभाषा प्रभावी हो जाएगी।
क्या हुआ है नियमों में बड़ा बदलाव
अब तक प्रचलित व्यवस्था के अनुसार कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन (CLI) का आशय केवल कॉल करने वाले यूजर के टेलीफोन नंबर (E.164 मानक) या आईपी एड्रेस तक ही सीमित था। दूरसंचार विभाग द्वारा किए गए नए संशोधन के अनुसार अब सीएलआई की परिभाषा का दायरा बढ़ाकर उसमें तीन मुख्य बिंदु शामिल किए गए हैं:
- कॉल करने वाले यूजर को टेलीकॉम कंपनी द्वारा आवंटित टेलीकॉम आइडेंटिफायर।
- सब्सक्राइबर डेटा रिकॉर्ड (कस्टमर वेरिफिकेशन रिकॉर्ड) में दर्ज यूजर का आधिकारिक नाम।
- लाइसेंसर (दूरसंचार विभाग) द्वारा समय-समय पर निर्धारित की जाने वाली कोई अन्य पहचान।
थर्ड पार्टी ऐप की निर्भरता होगी खत्म, नेटवर्क स्तर पर दिखेगा नाम
अब तक अज्ञात नंबरों की पहचान के लिए मोबाइल यूजर ट्रूकॉलर जैसे थर्ड-पार्टी ऐप्स पर निर्भर रहते थे, जिनका डेटा अक्सर क्राउडसोर्सिंग पर आधारित और अविश्वसनीय होता था। नए सरकारी नियम के प्रभावी होने से कॉलर का नाम सीधे टेलीकॉम नेटवर्क के कोर सिस्टम से प्रदर्शित होगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि सिम लेते समय आधार या आधिकारिक केवाईसी दस्तावेजों में दर्ज वास्तविक नाम ही स्क्रीन पर आएगा, जिससे साइबर अपराधी फर्जी नाम की आड़ लेकर लोगों को भ्रमित नहीं कर सकेंगे।
ट्राई और टेलीकॉम कंपनियों को अमल के कड़े निर्देश
दूरसंचार विभाग ने इस आदेश की प्रतिलिपि भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई), डायरेक्टर जनरल टेलीकॉम, कंट्रोलर जनरल ऑफ कम्युनिकेशन एकाउंट्स सहित सभी प्रमुख विंग्स को भेजते हुए नई व्यवस्था को तय समय सीमा 1 नवंबर 2026 से धरातल पर उतारने के निर्देश दिए हैं। dot calling line identification new rule के इस क्रांतिकारी कदम से डिजिटल फ्रॉड और फर्जी कॉलिंग नेटवर्क की कमर टूटना तय माना जा रहा है।



