शोक की लहर: पुखरायां निवासी पूर्व सांसद प्यारेलाल शंखवार का दिल्ली में निधन, राजनीतिक जगत में भारी स्तब्धता
पुखरायां कस्बे सहित संपूर्ण भोगनीपुर, घाटमपुर क्षेत्र और देश के राजनीतिक गलियारों में गहरा शोक छा गया है।

पुखरायां/कानपुर देहात। जनपद कानपुर देहात की माटी के लाल, दलित-पिछड़ों के कद्दावर नेता और घाटमपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके पूर्व सांसद प्यारेलाल शंखवार का बीती रात नई दिल्ली के एक प्रतिष्ठित अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। वह पिछले कुछ समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर मिलते ही पुखरायां कस्बे सहित संपूर्ण भोगनीपुर, घाटमपुर क्षेत्र और देश के राजनीतिक गलियारों में गहरा शोक छा गया है।
स्वर्गीय योगेन्द्र पाल सिंह यादव ‘बाबू जी’ थे राजनीतिक गुरु
पूर्व सांसद प्यारेलाल शंखवार का राजनीतिक सफर बेहद शानदार और संघर्षपूर्ण रहा। उन्होंने राजनीति का ककहरा और जनसेवा के संस्कार अपने राजनीतिक गुरु एवं पूर्व विधायक स्वर्गीय योगेन्द्र पाल सिंह यादव ‘बाबू जी’ के सानिध्य में सीखे थे। ‘बाबू जी’ (जिनका पहले ही देहावसान हो चुका है) के कुशल मार्गदर्शन में ही प्यारेलाल शंखवार ने राजनीति में अपने कदम मजबूती से जमाए थे और सफलता के शिखर तक पहुंचे थे। आज गुरु-शिष्य की यह जोड़ी इतिहास के पन्नों में अमर हो गई है।
विधानसभा से लेकर लोकसभा तक रहा दबदबा
1980 और 1990 के दशक में प्यारेलाल शंखवार ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाई। उन्होंने जनता दल (JD) के टिकट पर कानपुर देहात की भोगनीपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और 1989 तथा 1991 के लगातार विधानसभा चुनावों में भारी जीत हासिल कर क्षेत्र में अपना दबदबा कायम किया। इसके बाद, 1999 के आम चुनावों में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (BSP) के टिकट पर घाटमपुर (सुरक्षित) लोकसभा सीट से ताल ठोंकी। इस चुनाव में उन्होंने भारतीय जयंती पार्टी (BJP) की दिग्गज नेत्री कमल रानी वरुण को बेहद करीबी मुकाबले में मात्र लगभग 500 वोटों के अंतर से पराजित कर लोकसभा में प्रवेश किया था, जिसकी चर्चा आज भी राजनीतिक गलियारों में होती है।
दलितों और पिछड़ों की रहे मजबूत आवाज
प्यारेलाल शंखवार उत्तर प्रदेश के शंखवार व अन्य पिछड़े और दलित समुदायों के प्रमुख नेताओं में गिने जाते थे। वे बहुजन समाज पार्टी की नीतियों और सामाजिक न्याय के आंदोलनों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहे और जीवन पर्यंत शोषितों की आवाज उठाते रहे। क्षेत्र के लोग उन्हें एक बेहद सरल, सुलभ और जमीन से जुड़े नेता के रूप में याद कर रहे हैं। परिजनों के अनुसार, उनकी धर्मपत्नी का कई वर्ष पहले ही देहांत हो चुका था। वर्तमान में उनके परिवार में उनके दो पुत्र हैं, जो पिता की इस अपूरणीय क्षति से गहरे सदमे में हैं।
पुखरायां लाया जा रहा है पार्थिव शरीर, अंतिम दर्शन को उमड़ा हुजूम
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, पूर्व सांसद के पार्थिव शरीर को दिल्ली से उनके पैतृक निवास पुखरायां लाया जा रहा है। उनके अंतिम दर्शनों के लिए क्षेत्र के नागरिकों, शुभचिंतकों और विभिन्न दलों के नेताओं का उनके आवास पर पहुंचना शुरू हो गया है। उनके निधन पर जिले के तमाम वर्तमान व पूर्व विधायकों, जन प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने अपनी गहरी शोक संवेदनाएं व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की है। राजनीति के एक शुचितावादी युग का अंत होने से पूरे जनपद में भारी स्तब्धता है।



