शास्त्रीय विधा बच्चों के सर्वांगीण विकास का आधार : श्रद्धा पांडेय
श्री कला मंजरी कथक संस्थान द्वारा आयोजित नवल रंग कार्यक्रम ने रेलवे स्थित लिटिल बनी स्कूल में संस्कृति और कला का खूबसूरत समागम पेश किया।

- बिलासपुर में श्री कला मंजरी कथक संस्थान द्वारा आयोजित नवल रंग कार्यक्रम
- कार्यक्रम में कथक, लोक नृत्य और बॉलीवुड नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां
- विजेताओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया
- संस्कृति और कला के प्रति जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण योगदान
बिलासपुर: श्री कला मंजरी कथक संस्थान द्वारा आयोजित नवल रंग कार्यक्रम ने रेलवे स्थित लिटिल बनी स्कूल में संस्कृति और कला का खूबसूरत समागम पेश किया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सैक्रो की अध्यक्षा श्रद्धा पांडेय ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और छात्रों को शास्त्रीय विधाओं के महत्व पर प्रकाश डाला।
कथक और अन्य नृत्यों का मनमोहक मिश्रण
कार्यक्रम में संस्थान के छात्रों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए फैंसी ड्रेस, लोक नृत्य और बॉलीवुड नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण कथक नृत्य रहा, जिसमें संस्थान के छात्रों के साथ-साथ कोरबा से आई नन्ही कथक साधिका पर्वतन योद्धा ने भी अपनी अद्भुत प्रस्तुति दी।
विजेताओं को मिला सम्मान
विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। फैंसी ड्रेस, डांस कंपीटिशन और बॉलीवुड लाइट डांस में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्रों को पुरस्कार दिए गए।
संस्था के प्रयासों को मिली सफलता
कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्था के सचिव रितेश शर्मा, अध्यक्ष देवेंद्र शर्मा और कोषाध्यक्ष शीला शर्मा का महत्वपूर्ण योगदान रहा। गत दिवस रायगढ़ में हुए कार्यक्रम में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले यशस्वी मिश्रा, भाव्या देलसाव और आरवी थवाई को भी पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया गया।
संस्कृति और कला का उत्सव
यह कार्यक्रम न केवल छात्रों के लिए एक मंच प्रदान करता है, बल्कि समाज में कला और संस्कृति के प्रति जागरूकता फैलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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