कविता
दोस्त तेरे बिना मैं किधर जाऊंगा
दोस्त तेरे बिना मैं किधर जाऊंगा टूट जाऊंगा बिखर जाऊंगा। जिंदगी दर्द बन जाएगी कोई खुशी मेरे पास रह ना पाएगी। अकेला ही रहूंगा जिधर जाऊंगा टूट जाऊंगा बिखर जाऊंगा दोस्त तेरे बिना.....।

दोस्त तेरे बिना मैं किधर जाऊंगा
टूट जाऊंगा बिखर जाऊंगा।
जिंदगी दर्द बन जाएगी
कोई खुशी मेरे पास रह ना पाएगी।
अकेला ही रहूंगा जिधर जाऊंगा
टूट जाऊंगा बिखर जाऊंगा
दोस्त तेरे बिना…..।
यादों के फूल तुझे महक देंगे
गुजरे हुए पल मुझे कसक देंगे
ना जी पाऊंगा ना मर पाऊंगा
टूट जाऊंगा बिखर जाऊंगा
दोस्त तेरे बिना……
जब भी कोई शाम सुहानी होगी
याद ही तेरी एक निशानी होगी
तन्हाई से बहुत डर जाऊंगा
टूट जाऊंगा बिखर जाऊंगा
दोस्त तेरे बिना मैं किधर जाऊंगा।
अनिल कुमार दोहरे
ग्राम पोस्ट शाहजहांपुरमो 7885403489
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