
कानपुर। वायु प्रदूषण से केवल फेफड़े या श्वसन तंत्र ही प्रभावित नहीं होते बल्कि इससे हम सभी की आंखें भी खराब हो रही हैं। वायु प्रदूषण से आंखों में खुजली और लाल होने की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। वाहनों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है पेड़ पौधों की संख्या भी कम होती जा रही है जिससे प्रदूषण में और अधिक इजाफा हो रहा है।
कानपुर जैसे शहर में सड़कों की हालत भी अच्छी नहीं है यहां धूल भरी ऑक्सीजन लेने को लोग मजबूर हैं। नाक और मुंह की तरह आंखों को ढकना काफी मुश्किल है जिससे आंखों पर वायू प्रदूषण का बुरा असर पड़ता रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि हवा में वायु प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया है ऐसे में इसमें मौजूद नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, नाइट्रिक ऑक्साइड और सल्फर की उच्च मात्रा आंखों पर बुरा असर डाल रही है। जहरीली हवा के संपर्क में आने से आंखों में लालिमा, जलन, खुजली, पानी आने, धुंधला दिखाई देने जैसी अनेकों समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।
मोबाइल और लैपटॉप का ज्यादा इस्तेमाल भी हमारी आंखों को खराब कर रहा है। लंबे समय तक मोबाइल और लैपटॉप देखने से लोग सामान्य से बहुत कम पलक झपकाते हैं। इससे आंखों की सतह पर मौजूद नमी धीरे-धीरे खत्म हो रही है। लोगो की अनियमित लाइफस्टाइल भी इस समस्या को और बढ़ा रही है। हम सभी की यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है की वायु प्रदूषण को कम करने के लिए निजी कारों की जगह बस, मेट्रो, साइकिल, बैटरी वाहन या पैदल चलना चाहिए।
मोबाइल और लैपटॉप का आवश्यकता पर ही उपयोग करना चाहिए क्योंकि स्वस्थ आँखें पढ़ाई और सीखने की प्रक्रिया के लिए आवश्यकता हैं। दृष्टि और शिक्षा आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं। साफ दृष्टि न केवल पढ़ने-लिखने में मदद करती है बल्कि परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन और एकाग्रता बढ़ाने में भी सहायक होती है। आँखों के बिना जीवन चुनौतीपूर्ण होता है इसलिए इनकी रक्षा करना अत्यंत आवश्यक है। सभी तरह के प्रदूषण को रोकना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
इसे कम करने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर प्लास्टिक उपयोग कम करें, सार्वजनिक परिवहन या साइकिल का उपयोग करें, अधिक से अधिक पेड़ लगाएँ और ऊर्जा की बचत करें। कचरे का सही निपटान करें और पर्यावरण के प्रति जागरूक रहें और सभी को जागरूक करें।
आज्ञा कटियार, कक्षा 4
स्कूल यू पी किराना सेवा समिति बालिका विद्यालय तात्याटोपे नगर कानपुर



