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कानपुर : जनता दर्शन में उठी आवाज, 24 घंटे में सरकारी नाली और चकमार्ग से हटा कब्जा

दशक पुराना विवाद एक दिन में सुलझा, प्रशासन की तत्परता से मुक्त हुआ चकमार्ग

Story Highlights
  • सरकारी चकमार्ग और नाली से हटाया गया अतिक्रमण, संयुक्त टीम की कार्रवाई से मिली राहत

कानपुर नगर। जनता दर्शन में आए एक पुराने भूमि विवाद का समाधान जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के त्वरित हस्तक्षेप से मात्र 24 घंटे के भीतर करा दिया गया। ग्राम सवायजपुर निवासी रामबालक कुशवाहा की शिकायत पर लंबे समय से अवैध कब्जे में फंसी सरकारी नाली और चकमार्ग को संयुक्त टीम ने कब्जा मुक्त करा दिया।

रामबालक कुशवाहा ने जिलाधिकारी के समक्ष 1 दिसंबर को प्रस्तुत प्रार्थनापत्र में बताया था कि वह आराजी संख्या 1184 का भूमिधर काश्तकार है, जबकि उसके खेत के दक्षिण में आराजी संख्या 1185 सरकारी नाली और आराजी संख्या 1186 सरकारी चकमार्ग स्थित है। जिसे काश्तकार राजा सिंह उर्फ राम सिंह ने अपने खेत में मिला लिया था। विरोध करने पर झगड़ा और गाली-गलौज की स्थिति बनती रही। इस प्रकरण में वर्ष 2020 में तहसील न्यायालय से धारा 67 के तहत कब्जा हटाने का आदेश भी पारित हुआ था, बावजूद इसके न तो कब्जा हट सका और न ही नाली की पुराई हो पाई।

कई वर्षों से प्रकरण का समाधान न निकल पाने से परेशान रामबालक ने जनता दर्शन में शिकायत दर्ज कराई। प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद उपजिलाधिकारी नर्वल विवेक कुमार मिश्रा द्वारा राजस्व विभाग, विकास विभाग और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम गठित कर मौके पर कार्रवाई कराई गई।

संयुक्त टीम में राजस्व निरीक्षक नंदलाल, एडीओ सूरज प्रताप और स्थानीय चौकी प्रभारी मौके पर पहुंचे और अवैध रूप से कब्जाई गई सरकारी नाली और चकमार्ग को प्रभावी ढंग से कब्जा मुक्त कराया गया। टीम ने मौके पर स्थिति का निरीक्षण कर सरकारी भूमि को पुनः सुरक्षित किया। साथ ही विकास विभाग को निर्देश दिए गए कि चकमार्ग का निर्माण कार्य शीघ्र कर कार्ययोजना बनाकर उसे स्थायी रूप से दुरुस्त किया जाए, जिससे भविष्य में इस प्रकार की शिकायत दोबारा न आए।

कब्जा हटने के बाद ग्रामीण ने राहत की सांस ली। लंबे समय से चकमार्ग बंद होने और नाली की पुराई न होने के कारण खेतों में ट्रैक्टर नहीं जा पाता था और बरसात का पानी निकल न पाने से हर वर्ष फसल को भारी नुकसान होता था। प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई से न केवल सरकारी भूमि मुक्त हुई, बल्कि एक दशक पुरानी समस्या का समाधान भी संभव हो सका।

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aman yatra
Author: aman yatra

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