सावधान! बेजुबानों पर भी भारी पड़ रही है भीषण गर्मी: मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी ने जारी की एडवाइजरी
आम जनता से निराश्रित पक्षियों के लिए छतों पर पानी रखने की अपील की गई है।

कानपुर देहात: मार्च के महीने में ही बढ़ते तापमान ने इंसानों के साथ-साथ बेजुबान पशु-पक्षियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी डॉ. सुबोध कुमार ने पशुपालकों और आम जनमानस को सतर्क करते हुए कहा है कि इस भीषण गर्मी का सीधा असर पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर पड़ रहा है। शरीर में पानी की कमी होने से पशु न केवल बीमार हो रहे हैं, बल्कि दुधारू पशुओं में दूध घटने और गाभिन पशुओं में गर्भपात जैसी गंभीर समस्याएं भी सामने आ रही हैं।
डॉ. सुबोध कुमार ने बताया कि एक स्वस्थ पशु के शरीर में लगभग 65 प्रतिशत और खून में 80 प्रतिशत पानी होता है। गर्मी के कारण जब यह स्तर गिरता है, तो पशु हीट स्ट्रेस (Heat Stress) का शिकार हो जाता है। ऐसे में पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है और वे आसानी से घातक बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं।
हीट स्ट्रेस के लक्षणों को पहचानें और तुरंत करें उपचार
यदि आपका पालतू पशु या पक्षी अचानक सुस्त पड़ गया है, अत्यधिक हांफ रहा है, उसके मुंह से लार टपक रही है या हृदय की गति असामान्य रूप से तेज हो गई है, तो इसे हल्के में न लें। ये सभी लक्षण हीट स्ट्रेस के हैं। ऐसी स्थिति दिखने पर तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र पर संपर्क करना चाहिए। लापरवाही बरतने पर पशु निढाल हो सकता है और गंभीर स्थिति में उसकी मृत्यु भी हो सकती है।
पशुपालकों के लिए जरूरी सावधानियां: दोपहर 12 से 3 बजे तक न कराएं काम
मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी ने सख्त निर्देश दिए हैं कि जब तापमान 37 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो, तो भार ढोने वाले पशुओं से दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच कोई काम न कराया जाए। इसे पशु क्रूरता की श्रेणी में माना जाएगा। पशुओं को गर्मी से बचाने के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाएं: पशुओं को हमेशा छायादार और हवादार स्थान पर रखें। टीन शेड की छत पर घास या पराली डालकर उसे ठंडा रखें। दिन में कम से कम एक बार पशुओं को नहलाएं और उन्हें पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ व ठंडा पानी उपलब्ध कराएं। पशुओं को नियमित रूप से नमक, मिनरल मिक्सचर और संतुलित आहार दें ताकि दूध उत्पादन प्रभावित न हो।
आम जनमानस से अपील: छतों पर रखें पानी के बर्तन
डॉ. सुबोध कुमार ने सामाजिक संवेदनशीलता की अपील करते हुए कहा कि नागरिक अपने घरों के बाहर और छतों पर मिट्टी के बर्तनों में पानी रखें ताकि निराश्रित पशु-पक्षी अपनी प्यास बुझा सकें। ध्यान रहे कि पानी को छाया में रखें और समय-समय पर बदलते रहें, क्योंकि गर्म पानी बेजुबानों को नुकसान पहुँचा सकता है।



