
हर बार जब आप किसी से धोखा खाते हैं तो आपको एक महत्वपूर्ण सबक मिलता है। यह सीख भविष्य में ऐसे अनुभवों से बचने में मदद करती है और आपको अधिक सतर्क और समझदार बनाती है। अर्थात जीवन में सीखने की कई विधाएं हैं किताबों से, अनुभवों से, संवाद से और कभी-कभी केवल चुपचाप देख लेने भर से हमें बहुत कुछ सीख मिलती है। यह विविधता ही मानव चेतना की सबसे बड़ी खूबी है लेकिन दु:खद विडंबना यह है कि आज का शिक्षा तंत्र या सामाजिक तर्कशास्त्र हर सीखने को एक जैसे फ्रेम में कसना चाहता है।
आपका तरीका भी उनमें से एक है यह वाक्य जितना विनम्र प्रतीत होता है उतना ही गहरा व्यंग्य भी है उन पर जो अपने तरीके को ही अंतिम सत्य मानकर दूसरों पर थोपना चाहते हैं। हर व्यक्ति के सोचने, समझने, सीखने और प्रतिक्रिया देने की प्रक्रिया भिन्न होती है। यह जरूरी नहीं कि किसी की कही बात पर सभी एक जैसी प्रतिक्रिया दें लेकिन आज की दुनिया में, जहाँ भीड़ की सराहना ही सत्य की कसौटी बन चुकी है, वहां भिन्न दृष्टिकोण को असभ्यता या विद्रोह कहा जाता है।
हम यह भूल जाते हैं कि हर क्रिया के लिए एक ही प्रतिक्रिया केवल मशीनों में होती है इंसानों में नहीं। इंसानों की सोच परिस्थितियों, परिवेश, पीड़ा, अनुभव और चेतना की परतों से बनती है। यह विविधता किसी भी सजीव समाज की पहचान है, न कि खतरा। जो यह चाहते हैं कि हर विद्यार्थी एक जैसा बोले, हर नागरिक एक जैसा सोचे, हर शिक्षक एक ही भाषा में समझाए। वे दरअसल उस बहुरूपिये मानव मन की हत्या करना चाहते हैं।
वे भूल जाते हैं कि जो सवाल सबके भीतर से अलग-अलग तरीके से उठते हैं, उनके उत्तर भी अलग-अलग ही होंगे इसलिए अगर किसी ने आपके विचार से सहमति नहीं जताई, तो वह नासमझ नहीं बल्कि एक स्वतंत्र समझ का प्रतीक हो सकता है। विरोध हमेशा दुश्मनी नहीं होता, यह उस सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसमें हम दूसरों के सत्य के साथ अपने सत्य की तुलना करते हैं।
समाज को एक जैसे उत्तर नहीं चाहिए- उसे वैचारिक विविधता की जरूरत है। अगर हम हर प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने लगेंगे तो हम अंततः वही बन जाएंगे, जो सोचने की आजादी से डरते हैं क्योंकि सीखना केवल उत्तर रट लेने की प्रक्रिया नहीं है यह जानने की यात्रा है कि हर उत्तर एक जैसा नहीं होता।
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राजेश कटियार,कानपुर



