शिक्षा

सुप्रीम कोर्ट से सुप्रीम मांग : टीईटी को लेकर नई अर्जी दायर

प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों पर भी सरकारी शिक्षकों की तरह लागू हो टेट

राजेश कटियार,कानपुर देहात। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक नई अर्जी में यह दलील दी गई है कि टीईटी शिक्षा के अधिकार का अहम हिस्सा है क्योंकि इसके माध्यम से योग्य शिक्षकों का चयन और मूल्यांकन किया जाता है अर्जी में कहा गया है कि अल्पसंख्यक स्कूलों को टीईटी से छूट देना बच्चों के साथ अन्याय है। इन स्कूलों को आरटीई से बाहर रखना और शिक्षकों को टीईटी से मुक्त करना बच्चों के गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पाने के अधिकार का खुला उल्लंघन माना जाएगा।
याचिकाकर्ता की ओर से मांग की गई है कि इस मामले में उन्हें पक्ष रखने की अनुमति दी जाए ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि टीईटी शिक्षा के अधिकार की मूल भावना का हिस्सा है और इसका उद्देश्य यही सुनिश्चित करना है कि हर बच्चे को योग्य और सक्षम शिक्षक से शिक्षा मिले।

बड़ी पीठ को भेजा गया मामला
सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा आवश्यक है हालांकि इस फैसले में अल्पसंख्यक स्कूलों को अस्थायी छूट दी गई है और मामला अब बड़ी पीठ को भेजा गया है यह मामला तब सामने आया जब दो न्यायाधीशों की पीठ ने पर्मति एजुकेशनल एंड कल्चरल ट्रस्ट केस में दिए गए पुराने पांच जजों के फैसले पर सवाल उठाए। पुराने निर्णय में अल्पसंख्यक स्कूलों को आरटीई कानून के दायरे से बाहर बताया गया था अब यह पूरा मामला चीफ जस्टिस के समक्ष जाएगा, जो इस पर सुनवाई के लिए उचित बड़ी पीठ का गठन करेंगे। यह याचिका डॉ. खेम सिंह भाटी द्वारा दाखिल की गई है। अर्जी में यह भी कहा गया है कि पर्मति मामले में अदालत ने आरटीई कानून की मंशा को ठीक से नहीं समझा। यह कानून सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और पूर्ण शिक्षा देने के उद्देश्य से बनाया गया था इसलिए अल्पसंख्यक स्कूलों को इसके दायरे से बाहर रखना इस उद्देश्य को कमजोर करता है। इन संस्थानों में पढ़ने वाले बच्चों को भी योग्य शिक्षकों से शिक्षा पाने का अधिकार मिलना चाहिए।

टीईटी शिक्षा का आवश्यक हिस्सा
टीईटी को शिक्षा प्रणाली का अभिन्न हिस्सा माना गया है क्योंकि इसी के माध्यम से यह तय होता है कि बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षक योग्य, प्रशिक्षित और सक्षम हैं या नहीं अल्पसंख्यक स्कूलों को इस नियम से छूट देना बच्चों के साथ शैक्षिक असमानता पैदा करता है इसलिए यह आवश्यक है कि टीईटी को सभी प्रकार के स्कूलों में समान रूप से लागू किया जाए, ताकि हर बच्चे को अच्छी गुणवत्ता की शिक्षा प्राप्त हो सके।

अधिकारों के बीच संतुलन जरूरी
संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत अल्पसंख्यक संस्थानों को अपने स्कूलों का प्रबंधन करने का अधिकार प्राप्त है जबकि अनुच्छेद 21ए सभी बच्चों को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार देता है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इन दोनों अधिकारों के बीच संतुलन बनाना अत्यंत आवश्यक है। शिक्षा का अधिकार कमजोर न पड़े और अल्पसंख्यक संस्थानों की स्वतंत्रता भी सुरक्षित रहे इसके लिए न्यायपालिका से एक संतुलित और दूरगामी निर्णय की उम्मीद की जा रही है।

aman yatra
Author: aman yatra

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