कानपुर देहात: परिषदीय विद्यालयों में ई-वेस्ट प्रबंधन एवं चार बिन प्रणाली के माध्यम से दिया गया स्वच्छता का संदेश
शिक्षा मंत्रालय के निर्देश पर आज विशेष अभियान, बीएसए आशीष कुमार पांडेय ने सुरक्षित ई-कचरा निस्तारण पर दिया जोर

कानपुर देहात। जनपद के परिषदीय विद्यालयों में आज पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता एवं विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के उद्देश्य से ई-वेस्ट प्रबंधन विशेष अभियान तथा 4-बिन प्रणाली के माध्यम से स्वच्छ विद्यालय, हरित विद्यालय की अवधारणा पर आधारित गतिविधियों का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को इलेक्ट्रॉनिक कचरे के सुरक्षित निस्तारण तथा कचरे के उचित वर्गीकरण के प्रति जागरूक किया गया।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आशीष कुमार पांडेय ने बताया कि शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशों के क्रम में 28 अक्टूबर को आयोजित ई-वेस्ट कलेक्शन एवं रिस्पॉन्सिबल डिस्पोजल (ई-कचरा संग्रहण एवं जिम्मेदारीपूर्वक निस्तारण) विशेष अभियान के अंतर्गत विद्यालयों में प्रार्थना सभा के दौरान ई-वेस्ट विषय पर प्रश्नोत्तरी एवं जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित की गईं। विद्यार्थियों को बताया गया कि पुराने मोबाइल फोन, कंप्यूटर, बैटरी, तार, सर्किट तथा अन्य अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सामान्य कचरे में नहीं फेंकना चाहिए, बल्कि उन्हें अधिकृत संग्रहण केंद्रों अथवा रिसाइक्लर के माध्यम से सुरक्षित रूप से निस्तारित करना चाहिए। जिला समन्वयक सौरभ श्रीवास्तव ने बताया कि अभियान के अंतर्गत विद्यालयों को ईको क्लब पोर्टल पर निर्धारित विवरण अपलोड करने, विद्यार्थियों की सहभागिता दर्ज करने तथा गतिविधियों के जियो-टैग्ड फोटोग्राफ अपलोड करने के निर्देशों के अनुरूप कार्यवाही की गई।
एसआरजी अनंत त्रिवेदी ने बताया कि अलग-अलग प्रकार के कचरे के लिए निर्धारित रंगों के डस्टबिन के उपयोग की जानकारी दी गई। जिसमें हरा बिन फल-सब्जियों के छिलके, भोजन के अवशेष एवं अन्य गीला कचरा, नीला बिन कागज, प्लास्टिक एवं अन्य सूखा कचरा, लाल बिन स्वच्छता संबंधी अपशिष्ट, जैसे प्रयुक्त डायपर एवं सैनिटरी पैड आदि, जिनका सुरक्षित तरीके से निस्तारण आवश्यक है। काला बिन तार, सर्किट, बैटरी तथा पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे विशेष देखभाल योग्य अपशिष्ट, जिन्हें सामान्य कचरे से अलग रखकर अधिकृत केंद्रों को सौंपा जाना चाहिए।
एसआरजी संत कुमार दीक्षित ने विद्यार्थियों को समझाया कि कचरे को उसके प्रकार के अनुसार अलग-अलग रखना, पुनः उपयोग को बढ़ावा देना तथा पुनर्चक्रण की आदत अपनाना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। साथ ही, ई-वेस्ट के अनियंत्रित निस्तारण से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान के प्रति जागरूक करते हुए उसके जिम्मेदारीपूर्ण प्रबंधन का संदेश दिया गया।
एसआरजी अजय कुमार गुप्ता ने बताया कि इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यालयों को स्वच्छ, सुरक्षित एवं पर्यावरण के अनुकूल बनाना तथा विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति स्थायी व्यवहार विकसित करना है।



