जालौन: हजारों श्रद्धालुओं ने कार्तिक पूर्णिमा पर यमुना में लगाई आस्था की डुबकी
महिलाओं ने तुलसी पूजन कर सम्पूर्ण किया कार्तिक स्नान व्रत

- कार्तिक पूर्णिमा पर कालपी के यमुना घाटों पर हजारों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई।
- महिलाओं ने स्नान के बाद तुलसी पूजन कर एक माह का कार्तिक स्नान व्रत पूरा किया।
- ग्रंथों के अनुसार, इस दिन स्नान से पूरे वर्ष के स्नान का पुण्य मिलता है।
- पीलाघाट, बिहारी घाट और ढोढेश्वर घाट पर सर्वाधिक भीड़ उमड़ी।
- नगर पालिका द्वारा वस्त्र परिवर्तन के टेंट और सुरक्षा के लिए गोताखोरों की व्यवस्था की गई।
कालपी (जालौन)। धार्मिक नगर कालपी में आज कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रातःकाल से ही नगर के ऐतिहासिक व पौराणिक घाटों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। सूर्योदय से लेकर देर सुबह तक हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने मां यमुना में पवित्र स्नान कर पूजा-अर्चना की।
इस अवसर पर नगर सहित आस-पास के ग्रामीण अंचलों और समीपवर्ती जनपद कानपुर देहात से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु कालपी पहुंचे। महिलाओं ने स्नान के पश्चात घाटों पर तुलसी पूजन कर एक माह तक चले अपने कार्तिक स्नान व्रत का विधिवत समापन किया।
धर्मग्रंथों के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा-यमुना जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने से पूरे वर्ष के स्नान का पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष पूजा तथा दीपदान से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
नगर के पीलाघाट पर सर्वाधिक भीड़ उमड़ी, जबकि बिहारी घाट और ढोढेश्वर घाट पर भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचे। बाई घाट, जो कुछ समय पूर्व यमुना की बाढ़ से क्षतिग्रस्त हो गया था, वहां भी सैकड़ों भक्तों ने आस्था की डुबकी लगाई।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नगर पालिका परिषद कालपी द्वारा विशेष इंतज़ाम किए गए थे। महिलाओं के वस्त्र परिवर्तन हेतु टेंट लगाए गए, साथ ही सुरक्षा के दृष्टिगत घाटों के गहरे हिस्सों में बांस-बल्लियों से जाल लगाया गया। सभी घाटों पर तैराक, नाविक और गोताखोरों की टीम तैनात रही, जिससे किसी भी प्रकार की दुर्घटना न हो।
सुरक्षा और व्यवस्था के बीच कार्तिक पूर्णिमा का यह पावन स्नान शांतिपूर्ण और श्रद्धापूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। आस्था और भक्ति से सराबोर कालपी के घाटों का दृश्य देखते ही बनता था।



