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दीवारों में दरारें, हवा में लटके पिलर: जर्जर चैंबर भवन पर रंग-रोगन क्यों? अधिवक्ताओं ने खोली पोल

जाँच टीम ने भवन गिराने के दिए थे निर्देश, लेकिन प्रशासन मिलीभगत से कमियाँ छुपाने में जुटा।

कानपुर देहात जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं के बैठने के लिए लगभग 30 वर्ष पहले बनाया गया एक भवन इस समय बड़े हादसे को खुला निमंत्रण दे रहा है। जिला बार एसोसिएशन कानपुर देहात के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव एडवोकेट ने इस जर्जर भवन को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यह भवन किसी भी वक्त गिर सकता है।

विरोध के बावजूद गुपचुप काम शुरू

मुलायम सिंह यादव ने बताया कि भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए अधिवक्ताओं ने बीते सप्ताह जितेंद्र प्रताप सिंह चौहान की अध्यक्षता में एक “चैंबर संघर्ष समिति” का गठन किया है, जो 10 नवंबर से अपनी कार्रवाई शुरू कर देगी। इससे पहले भी अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल उच्च अधिकारियों को बता चुका है कि भवन उपयोगी नहीं है और निर्माण संबंधी खामियों के कारण इसे गिराया जाना ही एकमात्र विकल्प है।

लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि प्रशासनिक निर्णय को नजरअंदाज करते हुए ठेकेदार ने न केवल भवन पर रंग-रोगन शुरू कर दिया है, बल्कि टूटी-फूटी दीवारों पर पत्थर लगाने के लिए सामग्री भी इकट्ठा कर ली है।

बड़े खतरे को छुपाने का आरोप

अधिवक्ताओं का आरोप है कि प्रशासन की मिलीभगत से भवन की गंभीर कमियों को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि भवन का प्लास्टर टूट चुका है और कई पिलर तो ऐसे हैं जिनके नीचे धरातल ही नहीं है, वे हवा में लटके दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा, भवन परिसर में न तो पानी निकलने की सही व्यवस्था है, न ही शौचालय और पेयजल की समुचित सुविधा है।

ज्ञातव्य है कि जिला न्यायालय कानपुर देहात, जो कि जिला मुख्यालय माती में स्थित है, का उद्घाटन 19 जुलाई 2013 को हुआ था। वर्तमान में यहां दो बाह्य न्यायालय और एक ग्राम न्यायालय भी कार्यरत हैं।

aman yatra
Author: aman yatra

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