साहित्य जगतसम्पादकीय

भेड़िया क्या कभी शाकाहारी हो सकता है ?

क्या इतिहास के रक्तरंजित पन्नों से हमने कोई सबक सीखा? ऐतिहासिक भूलों से लेकर आधुनिक तुष्टिकरण तक एक विमर्श

सांस्कृतिक भारत का इतिहास बताता है कि संप्रभु भारत की संप्रभुता एवं अखंडता को किसने किसने और कब कब और क्यों छिन्न भिन्न किया है,और भारत में हुए उन आघातों के समय में कौन कौन लोग कैसी कैसी भूमिकाओं का निर्वाहन कर रहे थे ? भारत के उस स्वर्णिम काल से लेकर मुगलकाल और बाद के ब्रिटिश साम्राज्य की गुलामी के काल खण्ड तक की जो हकीकत इतिहास के पन्नों में दर्ज है उसकी कुछ भयावह स्मृतियां पढ़कर ऐसा लगता है कि उस दौर के सारे भयावह दर्दनाक झंझावातों के बाद मिली खंडित भारत माता की स्वतंत्रता के बाद भी हमारे देश के तत्तकालीन राष्ट्रनायक नेताओं बुद्धिजीवियों ने कुछ भी नहीं सीखा ! और न ही अभी भी कुछ सीखने को तैयार हैं !

स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू जी ने अपनी लिखी पुस्तक “डिस्कवरी ऑफ इंडिया,,में उन्होंने लिखा है कि महमूद गजनी ने जब अफगानिस्तान से आकर सोमनाथ मंदिर को लूटा था,हिन्दू आस्था पर भी चोट पहुंचाई थी उस समय भी मुहम्मद गजनी की सहायता कई हिन्दुओं ने की थी ! इस सत्य को पढ़कर हम कह सकते हैं कि,हमारे ही कुछ स्वजनों की मूर्खता के कारण से हमारे ही किन्हीं स्वार्थी जनों की स्वार्थ परता से सोमनाथ मंदिर की घटना सम्भव हुई थी,उन्हें बदले में गजनी ने दिया क्या ? इतिहासकार लिखते हैं वापसी में उन्हें भी मौत मिली !

कन्नौज के राजा जयचन्द्र मोहम्मद गोरी को लाये ! भारत के महान योद्धा प्रथ्वीराज चौहान का अन्त हुआ ! जयचन्द्र को क्या मिला ? उन्हें तो मिला कुछ भी नहीं लेकिन उसका दुष्परिणाम सारे देश ने भोगा ! फिर भी दुनियां को अमन चैन का सन्देश हम हिन्दू ही दे सकते हैं,स्वयं को मिटाकर मानवता का उपदेश हम हिन्दू जन ही दे सकते हैं,हमारी आत्मा में अपने मान सम्मान स्वाभिमान पद प्रतिष्ठा की लोलुपता इतनी गहरी है कि उसकी निरंतरता बनाये रखनें के लिए हम अपना आधा देश भी दे सकते हैं ! इतना सब करके भी हम हिन्दुओं को बदले में मिला क्या ? सिर्फ हिन्दुओं के साथ में बर्बरता हत्या लूट सामूहिक बलात्कार नरसंहार और पलायन !

वर्तमान समय में भी वो फिलिस्तीन गाजा की स्थितियों पर चिंता करते हैं लेकिन पड़ोसी देश बांगलादेश में हिन्दुओं के साथ हो रही क्रूर हिंसा हत्या बलात्कार लूट आगजनी पर खामोश रहते हैं,और कुछ लोग किन्तु परन्तु जैसे शब्दों के साथ बांग्लादेश के कट्टरपंथियों के साथ खड़े हुए दिखाई देते हैं ! उनके लिए जम्मू & कश्मीर में हिन्दुओं पर हुई हिंसा बर्बरता नहीं है,मुम्बई हमले का आतंकी अब्दुल कसाब गलत नहीं है, अफजल गुरु,याकूब मेमन गलत नहीं है,शाहीन बाग में सीएए का विरोध भी गलत नहीं था,न ही तबलीगी जमात गलत है,बांगलादेश में चुन चुन कर हिन्दुओं की निर्मम हत्या घर को बाहर से बंद करके आगजनी बलात्कार करने वाले लोग भी गलत नहीं हैं !

हिंसकता वादी सोच कभी सभ्यता वादी नहीं बन सकती,ऐसी हिंसकता वादी सोच से लोगों को स्वयं बचना एवं दूसरों को बचाना भी प्रत्येक हिन्दू नागरिक का कर्तव्य होना चाहिए,यह मीठे फल के बाग नही हैं जिनको जड़ पकड़ने में देर लगती है,वो नागफणी के पेड़ हैं जो जमीन का सहारा पाते ही फैल जाते हैं,ऐसे लोगों से बचना और बचाना है प्रेम सौहार्द और शांति स्थापित करनी है,यह वही लोग है जो अपने परंपरागत प्रभुत्व व प्रभाव को पुनः स्थापित करने के लिए हर सम्भव एवं असम्भव नैतिक और अनैतिकता भरे रास्तों पर चलकर अपने स्वार्थ की रोटी पुनः सेंकना चाहते हैं,इनकी ही खुदगर्जी के कारण से देश का अमन चैन भी बिगड़ता रहता है,और विकास बाधित होता है,जिसके कारण देश की उन्नतशील नीतियों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हो पाता है ! फिर भी हमारे ही देश के कुछ हिन्दू जन पुनः मुहम्मद गजनी कालखंड की तरह ही आचरण करते दिखाई देते हैं ! वो सब “गलत,, तो सिर्फ हिन्दू को ठहराते हैं जो चारा बनाकर हिन्दू को परोसते हैं उनमें अपना भविष्य देखते हैं !

दानवता के अन्दर वो मानवता की अपेक्षा करते हैं तथा दूसरों को भी उसमें समाहित करने का प्रयास करते हैं,उन्हें कल की चिंता नहीं है, उनमें सिर्फ वर्तमान में देश की सत्ता प्राप्त करने की चिंता दिखाई दे रही है ! आगे के भविष्य में चाहे गजनी आये चाहे गोरी आये,य औरंगजेब आये य बाबर उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता ! चाहे भारत के जन समुदाय के बीच गधा आये अथवा फिर कोई भेड़िया आये ! उनकी सोच है कि वो जब आयेंगे तब जो शेष होगा वह भोगेगा बाकी उनकी बला से।

एक विचार प्रवाह
विद्यासागर त्रिपाठी
मूसानगर कानपुर देहात उप्र.

aman yatra
Author: aman yatra

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