लखनऊ में कानपुर देहात के 7 शिक्षकों को मिला ‘राष्ट्रीय शिक्षा सारथी सम्मान’
अखिल भारतीय साहित्यकार परिषद के महामंत्री ने भारतीय संस्कृति पर दिया जोर; तीन पुस्तकों का हुआ विमोचन

कानपुर देहात। लखनऊ में शैक्षिक संवाद मंच उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित राष्ट्रीय शिक्षा सारथी सम्मान एवं पुस्तक विमोचन समारोह में जनपद कानपुर देहात के सात शिक्षकों को उनके उत्कृष्ट शैक्षिक योगदान के लिए विशिष्ट सम्मान से विभूषित किया गया है।
‘आनंदघर’ की संकल्पना और सांस्कृतिक चिंतन
इस अवसर पर मुख्य अतिथि, अखिल भारतीय साहित्यकार परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. पवन पुत्र बादल ने ‘आनंदघर’ की संकल्पना पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आनंदघर की पूर्णता केवल समृद्ध भारतीय परंपराओं के संरक्षण से ही संभव है, क्योंकि हमारी संस्कृति विज्ञान को परंपराओं से जोड़ती है और प्रकृति का शोषण नहीं, बल्कि दोहन करना सिखाती है।
डॉ. बादल ने अंग्रेजों द्वारा भारतीय संस्कृति पर किए गए षड्यंत्रों और वर्तमान में टेलीविजन सीरियलों द्वारा संस्कृति को पहुँच रही क्षति पर भी चिंता व्यक्त की। इस दौरान, गिजुभाई बधेका के शैक्षिक दर्शन ‘विद्यालय बने आनंदघर’ को साकार करने के मंच के लक्ष्य पर भी जोर दिया गया। उत्तराखंड के शिक्षाविद् विशिष्ट अतिथि डॉ. सुरेंद्र कुमार आर्यन ने मंच के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संरक्षक रामकिशोर पांडेय ने की, जबकि मंच का संचालन अध्यक्ष विनीत मिश्रा ने किया।
सम्मानित हुए ये 7 शिक्षक
कानपुर देहात से सम्मानित होने वाले कर्मठ शिक्षकों में निम्नलिखित नाम शामिल हैं:
डॉ. त्रिलोक चन्द
प्रतीक्षा त्रिपाठी
विकास त्रिपाठी
गुंजन पोरवाल
वैशाली मिश्रा
रीता सिंह
आलोक शर्मा
इन सभी शिक्षकों को शिक्षा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रीय शिक्षा सारथी सम्मान और राष्ट्रीय आधार सेतु सम्मान से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में तीन पुस्तकों, जिनमें प्रमोद दीक्षित मलय द्वारा संपादित ‘दिवस्वप्न–संवाद’ भी शामिल है, का विमोचन भी हुआ।



