
शिक्षक किसी भी समाज की नींव होते हैं। वे न केवल छात्रों के शैक्षिक ज्ञान का स्रोत होते हैं बल्कि उनके चरित्र और भविष्य का निर्माण भी करते हैं। एक अच्छे शिक्षक की भूमिका केवल पाठ्यक्रम पढ़ाने तक सीमित नहीं होती बल्कि वह अपने छात्रों में जीवन मूल्यों और नैतिकता का बीज भी बोता है परंतु आधुनिक शिक्षा प्रणाली में जहां शिक्षक को एक उपकरण की तरह देखा जाने लगा है, यह संतुलन बिगड़ गया है। शिक्षक जो कभी समाज के मार्गदर्शक हुआ करते थे, आज सिस्टम के हाथों बंधक बन गए हैं। शिक्षक रचनात्मकता के जन्मदाता होते हैं।
वे छात्रों को नई सोच, प्रश्न पूछने और समस्याओं के समाधान ढूंढने के लिए प्रेरित करते हैं परंतु वर्तमान शिक्षा प्रणाली में उन्हें पाठ्यक्रम के सख्त ढांचे और परीक्षा परिणामों तक सीमित कर दिया गया है। शिक्षा का उद्देश्य केवल छात्रों को परीक्षा पास कराना बन गया है जिससे शिक्षक की रचनात्मकता सीमित हो गई है।
शिक्षकों को भविष्य का निर्माता माना जाता है क्योंकि वे छात्रों को एक बेहतर नागरिक बनने के लिए तैयार करते हैं लेकिन आधुनिक शिक्षा प्रणाली ने उन्हें एक मशीन की तरह काम करने पर मजबूर कर दिया है। उन्हें छात्रों की व्यक्तिगत जरूरतों को समझने के बजाय, केवल पाठ्यक्रम पूरा करने और निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए काम करना होता है। यह प्रक्रिया न केवल शिक्षक की भूमिका को सीमित करती है, बल्कि छात्रों की व्यक्तिगत विकास की संभावना को भी बाधित करती है। शिक्षक को ज्ञान का पथ प्रदर्शक माना जाता है। वह छात्रों को अपने अनुभव और ज्ञान से मार्गदर्शन करता है लेकिन आज के सिस्टम में शिक्षक केवल आदेश पालनकर्ता बन गए हैं। उन्हें प्रशासनिक आदेशों, सरकारी नीतियों और नियमों का पालन करना होता है। इससे उनकी स्वतंत्र सोच और मार्गदर्शन की क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
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राजेश कटियार,कानपुर



