सीएचसी बॉन्डेड 2019 बैच के साथ अन्याय: तीन महीने से वेतन नहीं, असुरक्षित माहौल में काम करने को मजबूर
ये डॉक्टर भेदभाव, कम वेतन और असुरक्षित माहौल का सामना कर रहे हैं।

लखनऊ,उत्तर प्रदेश – एम.बी.बी.एस. 2019 बैच के सीएचसी बॉन्डेड डॉक्टर वर्तमान में सरकार द्वारा लगाए गए दो वर्ष के बॉन्ड पर काम कर रहे हैं। ये डॉक्टर भेदभाव, कम वेतन और असुरक्षित माहौल का सामना कर रहे हैं।
पिछले वर्ष 2018 बैच में मेडिकल कॉलेजों में पर्याप्त सीटें होने के कारण सभी डॉक्टरों को वहीं नियुक्ति मिली। उन्हें नियमित वेतन, आवास और सुरक्षित माहौल मिला, जिससे उन्हें कोई समस्या नहीं हुई।
इसके विपरीत, 2019 बैच के लिए मेडिकल कॉलेजों में पर्याप्त सीटें उपलब्ध नहीं थीं। इसलिए, सरकार ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में भी सीटें खोल दीं। इस प्रक्रिया में 430 डॉक्टरों को सीएचसी में तैनात किया गया, जबकि बाकी डॉक्टरों को मेडिकल कॉलेजों में नियुक्ति मिली।
वेतन और सुविधाओं में बड़ा अंतर
मेडिकल कॉलेजों में काम कर रहे डॉक्टरों को लेवल 10 और 5400 ग्रेड पे के आधार पर हर महीने लगभग ₹1,00,000 से ₹1,20,000 तक का वेतन मिल रहा है। वहीं, सीएचसी में कार्यरत डॉक्टरों को पिछले तीन महीने से एक भी वेतन नहीं मिला है। अब प्रशासन ने बताया है कि उनका वेतन सिर्फ ₹50,000 से ₹60,000 प्रति माह होगा, जो न केवल बहुत कम है बल्कि पूरी तरह से भेदभावपूर्ण भी है।
असुरक्षित और कठिन कार्य परिस्थितियाँ
इन डॉक्टरों का कहना है कि वेतन के अलावा सीएचसी में काम करने की परिस्थितियाँ भी बहुत असुरक्षित हैं। यहाँ न तो रहने की सुविधा है और न ही सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था। कई डॉक्टर रोज़ 30 से 50 किलोमीटर की यात्रा करके ड्यूटी पर आते हैं। महिला डॉक्टरों के लिए ग्रामीण केंद्रों पर रहना और भी मुश्किल और असुरक्षित है, क्योंकि किसी भी समय कोई भी व्यक्ति केंद्र में आकर विवाद कर सकता है।
डॉक्टरों की मांगें
सीएचसी बॉन्डेड 2019 बैच की मुख्य मांगें हैं कि सरकार इस भेदभाव को तुरंत खत्म करे। सभी डॉक्टरों को मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के बराबर समान वेतन और सुविधाएँ दी जाएँ। इसके अलावा, उनके पिछले तीन महीनों का वेतन तुरंत जारी किया जाए और उनकी सुरक्षा और रहने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
सीएचसी में कार्यरत डॉ. सोनल, डॉ. नम्रता, डॉ. रितिका, डॉ. प्रियंका, डॉ. देवेंद्र, डॉ. अंकित, डॉ. संदीप, डॉ. अरुण, डॉ. मोहित, डॉ. प्रियंका और डॉ. वैष्णवी ने सामूहिक रूप से कहा कि यह केवल वेतन का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह पूरे स्वास्थ्य तंत्र के भविष्य से जुड़ा सवाल है। उनका कहना है कि कड़ी मेहनत करने वाले डॉक्टरों को उनका हक न देकर सरकार भविष्य की प्रतिभाओं को हतोत्साहित कर रही है।
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