यूपी के पूर्व-प्राथमिक स्कूलों का होगा कायाकल्प: 6 सदस्यीय कोर ग्रुप संभालेगा कमान, बच्चों को मिलेगी हाईटेक शिक्षा
अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा के निर्देश पर जिलों में गठित होगा विशेष दल, आंगनबाड़ी केंद्रों को स्कूल परिसर में शिफ्ट करने की तैयारी।
UP Pre-Primary School Education व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और प्रभावी बनाने के लिए उत्तर प्रदेश शासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। अपर मुख्य सचिव बुनियादी व माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा के निर्देशों के तहत अब राज्य के सभी जिलों में 6 सदस्यीय प्रारंभिक बाल देखभाल और शिक्षा (ECCE) कोर समूह का गठन किया जाएगा। इस विशेष दल की जिम्मेदारी 3 से 6 साल के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर माहौल उपलब्ध कराना होगी। इस पहल से सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे और शिक्षण पद्धति में क्रांतिकारी बदलाव आने की उम्मीद है।
कोर समूह में शामिल होंगे ये विशेषज्ञ
इस विशेष कोर समूह की संरचना बेहद संतुलित रखी गई है ताकि शिक्षा और प्रशासन का बेहतर समन्वय हो सके। इसमें जिला समन्वयक (दक्षता/प्रशिक्षण), नोडल राज्य संसाधन समूह (SRG) सदस्य, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) का नामित प्रवक्ता, जिला बुनियादी शिक्षा अधिकारी द्वारा नामित शैक्षणिक संसाधन व्यक्ति (ARP), शिक्षक संकुल सदस्य और बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) शामिल होंगे। यह समूह सीधे तौर पर पूर्व-प्राथमिक विद्यालयों में संसाधनों की उपलब्धता और बच्चों की सीखने की क्षमता की निगरानी करेगा।
आंगनबाड़ी केंद्रों का होगा एकीकरण
नई नीति के तहत UP Pre-Primary School Education को और अधिक सुव्यवस्थित करने के लिए प्राथमिक विद्यालयों के 200 मीटर के दायरे में गैर-विभागीय भवनों में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों को अब सीधे विद्यालय परिसर में ही स्थानांतरित किया जाएगा। इससे बच्चों को कक्षा 1 में प्रवेश से पहले औपचारिक स्कूली माहौल मिल सकेगा। कोर समूह का मुख्य ध्यान बच्चों के नामांकन को बढ़ाने, कम से कम 70 प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने और अभिभावकों को प्रारंभिक शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक करने पर रहेगा।
प्रशिक्षण और मूल्यांकन की नई व्यवस्था
शिक्षकों के कौशल को निखारने के लिए नियमित अंतराल पर प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इसके साथ ही बच्चों के सर्वांगीण विकास को मापने के लिए एक ‘समग्र प्रगति कार्ड’ (Holistic Progress Card) तैयार किया जाएगा। यह कार्ड केवल अंकों पर आधारित न होकर बच्चे की रचनात्मकता, व्यवहार और बुनियादी दक्षता का भी मूल्यांकन करेगा। शासन का मानना है कि इस डिजिटल और जमीनी समन्वय से प्रदेश के नन्हे-मुन्नों का भविष्य और अधिक उज्ज्वल होगा।
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