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हाईवे पर आवारा पशुओं से दुर्घटनाओं पर रोकथाम के लिए प्रशासन सख्त

जनपद जालौन के जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा पशुओं के विचरण से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे दिन-रात की शिफ्ट में कार्मिकों की ड्यूटी लगाकर हाईवे पर घूम रहे आवारा पशुओं को पकड़कर गौशालाओं में भेजें।

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  • जिलाधिकारी ने दिए सख्त निर्देश

उरई: जनपद जालौन के जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा पशुओं के विचरण से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे दिन-रात की शिफ्ट में कार्मिकों की ड्यूटी लगाकर हाईवे पर घूम रहे आवारा पशुओं को पकड़कर गौशालाओं में भेजें।

तीन शिफ्ट में काम करेगी टीम

जिलाधिकारी ने कहा कि हाईवे पर आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए गठित टीम तीन शिफ्ट में काम करेगी। इन टीमों को आवारा पशुओं को कैप्चर करके आसपास की गौशालाओं में ले जाना होगा। इससे हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं में कमी आएगी।

पशु चिकित्सकों की जिम्मेदारी

पशु चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे गौशालाओं में तैनात कर्मचारियों को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के साथ समन्वय स्थापित करते हुए हाईवे पर आवारा पशुओं की निगरानी के लिए दिन-रात ड्यूटी पर लगाएं। इसके अलावा, पशु चिकित्सकों को गौशालाओं में पशुओं की देखभाल और बीमार पशुओं के इलाज का भी जिम्मा सौंपा गया है।

निजी पशुपालकों पर कार्रवाई

जिलाधिकारी ने निजी पशुपालकों से अपील की है कि वे अपने पशुओं को हाईवे पर न छोड़ें। यदि कोई पशुपालक ऐसा करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।

खंड विकास अधिकारियों की जिम्मेदारी

सभी खंड विकास अधिकारियों और अधिशासी अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने क्षेत्र में आवारा पशुओं पर नजर रखें। यदि उनके क्षेत्र में कोई आवारा पशु पाया जाता है तो संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होगा।

गौशालाओं में बेहतर व्यवस्था

जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी, उप जिलाधिकारियों और नोडल अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे गौशालाओं का नियमित दौरा करें और यह सुनिश्चित करें कि गौशालाओं में पशुओं के लिए पर्याप्त चारा, पानी और साफ-सफाई की व्यवस्था हो। साथ ही, बीमार पशुओं का भी समुचित इलाज किया जाए।

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