ऐतिहासिक रहा बार काउंसिल चुनाव: 86.38% मतदान के साथ लोकतंत्र का उत्सव संपन्न
जनपद न्यायालय परिसर में 30 और 31 जनवरी को आयोजित बार काउंसिल चुनाव प्रबंधन और जागरूकता की नई मिसाल पेश करते हुए संपन्न हुए। कुल 940 पंजीकृत मतदाताओं में से 812 अधिवक्ताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया

- प्रबंधन की जीत: कतारें बढ़ीं तो तत्काल बढ़ाए गए बूथ, अधिवक्ताओं ने उत्साह के साथ डाला वोट
सुशील त्रिवेदी अमन यात्रा ब्यूरो,जनपद न्यायालय (कानपुर देहात)जनपद न्यायालय परिसर में 30 और 31 जनवरी को आयोजित बार काउंसिल चुनाव प्रबंधन और जागरूकता की नई मिसाल पेश करते हुए संपन्न हुए। कुल 940 पंजीकृत मतदाताओं में से 812 अधिवक्ताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इस प्रकार 86.38 प्रतिशत का भारी मतदान दर्ज किया गया, जो पिछले चुनावों की तुलना में काफी उत्साहजनक रहा।
समय पर लिए गए फैसलों से टली अव्यवस्था
चुनाव के पहले दिन यानी 30 जनवरी को शुरुआत में केवल 10 मतदान बूथ बनाए गए थे। मतदाताओं की बढ़ती भीड़ और लंबी कतारों को देखते हुए जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और वरिष्ठ अधिवक्ता जितेन्द्र प्रताप सिंह चौहान ने चुनाव अधिकारियों से समन्वय किया। त्वरित निर्णय लेते हुए 7 अतिरिक्त बूथ बढ़ाए गए, जिससे मतदान प्रक्रिया ने गति पकड़ी।
अंतिम दिन भी इसी रणनीति को अपनाते हुए बूथों की संख्या और बढ़ाई गई, ताकि किसी भी अधिवक्ता, विशेषकर वरिष्ठ अधिवक्ताओं को असुविधा न हो।
समन्वय और सुव्यवस्थित वातावरण
पूरे चुनाव के दौरान प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच बेहतर तालमेल देखने को मिला। बैठने की पर्याप्त व्यवस्था और टोल प्लाजा पर विशेष सहयोग ने प्रक्रिया को सुगम बनाया:
* टोल सुविधा: कानपुर नगर से आने-जाने वाले अधिवक्ताओं के लिए बारा टोल प्लाजा प्रबंधन द्वारा दोनों दिन निशुल्क और निर्बाध आवागमन की व्यवस्था की गई।
* अनुशासन: पुलिस और जिला प्रशासन के साथ मिलकर अधिवक्ताओं की टीम ने परिसर में शांति बनाए रखी।
इनका रहा विशेष सहयोग
चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में जिला बार एसोसिएशन अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव, वरिष्ठ अधिवक्ता जितेन्द्र प्रताप सिंह चौहान, महामंत्री घनश्याम सिंह राठौर, अध्यक्ष (माती मुख्यालय) शैलेन्द्र तिवारी, महामंत्री अरविन्द कुशवाहा और पूर्व महामंत्री संजय सिसोदिया का नेतृत्व सराहनीय रहा।
व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने में परितोष सिंह चन्देल, प्रवीण कुमार, जितेन्द्र बाबू, रोहित शुक्ला, योगेन्द्र प्रताप सिंह, सुशील कटियार एवं महेन्द्र सिंह की टीम सक्रिय रही। चुनाव विशेषज्ञों के अनुसार, बूथों की संख्या में समय रहते वृद्धि और मतदाता-केंद्रित प्रबंधन ही इस उच्च मतदान प्रतिशत का मुख्य आधार बना।



