कानपुर देहात: जर्जर स्कूली भवनों को एक हफ्ते में गिराने का अंतिम अल्टीमेटम
बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन सख्त, मूल्यांकन के बाद भी ध्वस्तीकरण में देरी पर अधिकारियों को अंतिम चेतावनी
राजेश कटियार, कानपुर देहात। जनपद के बेसिक शिक्षा विभाग के नियंत्रण में संचालित परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और संविलियन विद्यालयों के जर्जर व निष्प्रयोज्य (बेकार) हो चुके भवनों के ध्वस्तीकरण को लेकर प्रशासन बेहद सख्त हो गया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आशीष कुमार पाण्डेय ने इस मामले में ढिलाई बरतने वाले सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को कड़ी चेतावनी जारी की है।
उन्हें एक सप्ताह के भीतर ऐसे असुरक्षित ढांचों को गिराकर रिपोर्ट सौंपने का अंतिम निर्देश दिया गया है। मिली जानकारी के अनुसार तकनीकी समिति द्वारा मूल्यांकन किए जाने के बाद इन जर्जर विद्यालय भवनों को गिराने और उनकी नीलामी करने की सूची काफी पहले ही खंड शिक्षा अधिकारियों को उपलब्ध करा दी गई थी। इसके बावजूद अब तक इस प्रक्रिया को पूरा नहीं किया गया है। अधिकारियों की इस सुस्ती और लापरवाही पर उच्चाधिकारियों ने गहरा रोष व्यक्त किया है। पत्र में स्पष्ट रूप से चिंता जताई गई है कि इन जर्जर और अनुपयोगी ढांचों के परिसर में मौजूद रहने से स्कूल में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं, शिक्षकों या किसी भी अन्य व्यक्ति के साथ कभी भी कोई अप्रिय या गंभीर दुर्घटना घट सकती है।
बच्चों की सुरक्षा को शीर्ष प्राथमिकता देते हुए अब इस काम में और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बीएसए ने खंड शिक्षा अधिकारियों को अंतिम बार सचेत करते हुए निर्देशित किया है कि जिन असुरक्षित ढांचों का मूल्यांकन समिति द्वारा पहले ही असेसमेंट किया जा चुका है उनका ध्वस्तीकरण तत्काल (एक सप्ताह के भीतर) सुनिश्चित कराया जाए। इसके साथ ही की गई कार्यवाही से कार्यालय को भी अवगत कराना होगा।
बीएसए ने आदेश में कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि यदि समय पर इन जर्जर भवनों को नहीं गिराया गया और इस वजह से कोई भी अप्रिय घटना या हादसा होता है तो संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी को सीधे तौर पर जिम्मेदार माना जाएगा। कार्यों और दायित्वों के प्रति बरती गई इस शिथिलता के लिए दोषी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू कर दी जाएगी जिसकी पूरी जिम्मेदारी उनकी खुद की होगी।



