रसूलाबाद में घर में घुसकर जानलेवा हमले का मामला: अदालत ने दोषी मुश्किलकुशा को सुनाई 5 वर्ष की कैद, 26 हजार जुर्माना
एडीजे पंचम पूनम सिंह की अदालत ने सुनाया फैसला, धारदार हथियारों से दंपती और बच्चे को लहूलुहान करने का जुर्म साबित
कानपुर देहात। जनपद न्यायालय स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पंचम) पूनम सिंह की अदालत ने घर में घुसकर जानलेवा हमला करने के करीब पौने छह साल पुराने मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। kanpur dehat court ने मामले की अंतिम सुनवाई पूरी करते हुए अभियुक्त मुश्किलकुशा को दोषी करार दिया और उसे 5 वर्ष के साधारण कारावास तथा कुल 26,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर दोषी को 45 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
घर में सो रहे परिवार पर आधी रात को हुआ था खूनी हमला
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 2 जनवरी 2021 की है। थाना रसूलाबाद के वार्ड नंबर 11 नेहरू नगर निवासिनी रीना पत्नी उस्मान ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि वह अपने पति और बच्चों के साथ घर पर सो रही थी। रात करीब 12:20 बजे चार युवक चाकू, कुल्हाड़ी और डंडों से लैस होकर गाली-गलौज करते हुए जबरन घर में घुस आए। हमलावरों ने परिवार पर ताबड़तोड़ प्रहार किए, जिससे रीना, उनके पति उस्मान और पुत्र शोएब लहूलुहान होकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। डायल 100 पुलिस ने एंबुलेंस बुलाकर घायलों को अस्पताल पहुंचाया, जहां चोट गंभीर होने पर रीना व उस्मान को हैलट अस्पताल कानपुर नगर रेफर किया गया था।
मुश्किलकुशा के खिलाफ दाखिल हुआ था आरोप
पत्र पुलिस ने विवेचना के बाद अभियुक्त मुश्किलकुशा के खिलाफ धारा 323, 308, 504 और 506 आईपीसी के तहत आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया था, जबकि अन्य आरोपियों इरशाद, उस्मान और सुल्तान के विरुद्ध विवेचना प्रचलित रही। इस मामले में न्यायालय में विचारण केवल मुश्किलकुशा का ही संपन्न हुआ। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने पुरानी रंजिश में झूठा फंसाए जाने का तर्क दिया।
अदालत में शासकीय अधिवक्ता ने साबित किया जुर्म
शासकीय अधिवक्ता (एडीजीसी) प्रदीप पांडे ने अभियोजन की ओर से जोरदार बहस करते हुए चश्मदीद गवाहों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट के अकाट्य साक्ष्य अदालत के समक्ष रखे। उन्होंने तर्क दिया कि तथ्य के गवाहों ने घटना को अपनी आंखों से देखा है और चिकित्सीय परीक्षण में प्राणघातक चोटों की पुष्टि हुई है। अदालत ने अभियोजन के तर्कों को स्वीकार करते हुए मुश्किलकुशा को धारा 308 आईपीसी में 5 वर्ष की सजा व 25,000 रुपये जुर्माना तथा धारा 323 आईपीसी में 1 वर्ष की सजा व 1,000 रुपये जुर्माने से दंडित किया। धारा 504 व 506 के आरोपों से उसे दोषमुक्त किया गया। फैसले के समय kanpur dehat court परिसर में दोनों पक्षों के लोगों की भारी गहमागहमी रही।



