कागजों में आदेश, कूड़ेदान में दस्तावेज! मानव संपदा पोर्टल सुधार के नाम पर शिक्षकों का उत्पीड़न आखिर कब रुकेगा
कागजों में आदेश और कूड़ेदान में दस्तावेज का आरोप, बीआरसी के बाबू-ऑपरेटरों पर लापरवाही का ठीकरा, 25 नवंबर की डेडलाइन से भड़के शिक्षक

राजेश कटियार, कानपुर देहात। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से मानव संपदा पोर्टल पर ई-सर्विस बुक सुधारने का कड़ा अल्टीमेटम तो जारी हो गया है लेकिन धरातल पर सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। हर बार की तरह इस बार भी बड़े-बड़े आदेश जारी कर दिए गए हैं लेकिन इन आदेशों की आड़ में पिसना सिर्फ और सिर्फ आम शिक्षक को ही पड़ता है। शिक्षकों का आरोप है कि जब भी पोर्टल सुधार का कोई नया आदेश आता है वे अपने जरूरी दस्तावेज (कागज) लेकर ब्लॉक संसाधन केंद्र दौड़ते हैं। वहां बाबू या प्रभारी कागज जमा कर लेते हैं और एक रिसीविंग (पावती) थमाकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं लेकिन खेल यहीं से शुरू होता है। एक-एक शिक्षक अपनी सर्विस बुक सुधरवाने के लिए तीन से चार बार तक सारे डॉक्यूमेंट्स जमा कर चुका है लेकिन सालों बीत जाने के बाद भी पोर्टल पर डेटा जस का तस त्रुटिपूर्ण ही दिखाई देता है।
शिक्षकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि बीआरसी स्तर पर जमा किए जाने वाले उनके महत्वपूर्ण दस्तावेज अलमारियों में चढ़ने के बजाय सीधे कूड़ेदान के हवाले कर दिए जाते हैं। लापरवाही खुद ब्लॉक स्तर के बाबू और कंप्यूटर ऑपरेटर करते हैं लेकिन गाज गिरने की धमकी हमेशा शिक्षकों को दी जाती है। बार-बार चक्कर काटने से शिक्षकों का मानसिक उत्पीड़न तो होता ही है साथ ही शिक्षण कार्य भी प्रभावित होता है। अब बड़ा सवाल यह उठता है कि
जब शिक्षक समय पर अपने पूरे साक्ष्य और दस्तावेज बीआरसी में जमा कर देते हैं तो वहां के जिम्मेदार कर्मचारी उसे पोर्टल पर अपडेट क्यों नहीं करते? क्या उच्च अधिकारी कभी बीआरसी में पड़े धूल फांकते और डंप किए गए कागजों का औचक निरीक्षण करेंगे या कभी करते हैं? हर बार डेडलाइन जैसे इस बार 25 नवंबर देकर केवल शिक्षकों को डराना और बाबू-ऑपरेटरों की लापरवाही पर पर्दा डालना कहां का न्याय है।
शिक्षकों का कहना है कि इस बार केवल आदेश जारी करने से काम नहीं चलेगा। अधिकारियों को बीआरसी स्तर पर एक जवाबदेही रजिस्टर तय करना चाहिए ताकि पता चल सके कि किस शिक्षक ने कब कागज जमा किए और किस बाबू की लापरवाही के कारण वह डेटा पोर्टल पर फीड नहीं हो पाया। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आशीष कुमार पाण्डेय ने स्पष्ट किया है कि शिक्षकों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि बीआरसी स्तर पर लंबित प्रकरणों और जमा दस्तावेजों की समीक्षा कराई जाएगी। यदि किसी बाबू या ऑपरेटर द्वारा लापरवाही बरतने या साक्ष्य डंप करने की बात सामने आती है तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। शिक्षकों की समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए पारदर्शिता के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं।



