पंचायत चुनाव आरक्षण: पिछड़ा वर्ग आयोग ने कानपुर देहात में जनप्रतिनिधियों के साथ की बड़ी बैठक, जुटाए जमीनी आंकड़े
विकास भवन में बृजेश कुमार की अध्यक्षता में हुआ मंथन, सामाजिक, शैक्षिक और राजनीतिक भागीदारी पर मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट
कानपुर देहात: उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग की बैठक आज सदस्य बृजेश कुमार (सेवानिवृत्त जिला जज) की अध्यक्षता में विकास भवन सभागार कक्ष में आयोजित की गई। बैठक में आयोग के सदस्य संतोष कुमार विश्वकर्मा (सेवानिवृत्त एडीजे), सदस्य डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया जी (सेवानिवृत्त आईएएस) एवं सदस्य एस.पी. सिंह (सेवानिवृत्त आईएएस), जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नीरज रानी, अन्य जनप्रतिनिधिगण, जिलाधिकारी कपिल सिंह, मुख्य विकास अधिकारी विधान जायसवाल सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान/प्रशासक सहित विभिन्न स्तरों के जनप्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। आयोग द्वारा मा0 जनप्रतिनिधियों से ग्रामीण क्षेत्रों में पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या, सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक एवं राजनीतिक स्थिति के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की गई। बैठक का प्रमुख उद्देश्य स्थानीय ग्रामीण निकाय/पंचायत चुनावों से पूर्व पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के संबंध में आवश्यक तथ्य, जमीनी स्थिति एवं जनप्रतिनिधियों के सुझाव प्राप्त करना रहा। आयोग द्वारा यह जानने का प्रयास किया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में पिछड़ा वर्ग की वर्तमान सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक एवं राजनीतिक स्थिति क्या है तथा स्थानीय निकायों में उनका प्रतिनिधित्व किस स्तर पर है। आयोग द्वारा जनप्रतिनिधियों से प्राप्त तथ्यों एवं अनुभवों के आधार पर पिछड़ा वर्ग की स्थिति का समग्र आकलन किया जा रहा है, ताकि आरक्षण से संबंधित विषय पर तथ्यपरक एवं उपयुक्त सुझाव/अनुशंसा प्रस्तुत करने में आवश्यक आधार प्राप्त हो सके।
बैठक के दौरान आयोग के माननीय सदस्यगण द्वारा जनप्रतिनिधियों से उनके क्षेत्र में पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या, विभिन्न पिछड़ा वर्ग समुदायों की संख्या एवं उनकी सामाजिक स्थिति के संबंध में जानकारी ली गई। जनप्रतिनिधियों से यह भी जाना गया कि उनके क्षेत्र में कौन-कौन से पिछड़े वर्ग के समुदाय अधिक संख्या में निवास करते हैं तथा विभिन्न समुदायों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति में क्या अंतर है। आयोग ने ग्रामीण क्षेत्रों में पिछड़ा वर्ग के सामाजिक एवं आर्थिक पिछड़ेपन की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए जनप्रतिनिधियों के जमीनी अनुभव एवं सुझाव भी प्राप्त किए।
आयोग द्वारा पिछड़ा वर्ग के लोगों की शैक्षिक स्थिति, बच्चों की शिक्षा, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा तक पहुंच तथा शिक्षा के क्षेत्र में आने वाली प्रमुख बाधाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की गई। इसके साथ ही यह भी पूछा गया कि पिछड़ा वर्ग के लोगों को समाज में अन्य वर्गों के समान अवसर एवं सम्मान प्राप्त हो रहा है अथवा नहीं तथा उनके साथ सामाजिक समानता एवं बराबरी का व्यवहार किस स्तर तक किया जा रहा है। बैठक में पिछड़ा वर्ग के परिवारों की आवासीय स्थिति के संबंध में भी जानकारी ली गई। जनप्रतिनिधियों से यह जानकारी प्राप्त की गई कि पिछड़ा वर्ग के कितने परिवार पक्के मकानों में निवास करते हैं तथा कितने परिवार अभी भी आवासीय सुविधाओं से वंचित हैं।
इसी क्रम में शौचालय, पेयजल, बिजली, सड़क, स्वास्थ्य सुविधाओं तथा अन्य मूलभूत नागरिक सुविधाओं तक पिछड़ा वर्ग के लोगों की पहुंच के संबंध में भी क्षेत्रवार जानकारी एवं अनुभव प्राप्त किए गए। आयोग द्वारा पिछड़ा वर्ग के लोगों की आजीविका के प्रमुख साधनों एवं आर्थिक स्थिति के संबंध में भी जानकारी ली गई। जनप्रतिनिधियों से यह जाना गया कि उनके क्षेत्रों में पिछड़ा वर्ग के लोग मुख्य रूप से कृषि, पशुपालन, मजदूरी, छोटे व्यवसाय, कुटीर उद्योग, स्वरोजगार अथवा अन्य किन व्यवसायों पर निर्भर हैं। साथ ही भूमि एवं आर्थिक संसाधनों तक पहुंच, रोजगार के अवसर, स्वरोजगार तथा आर्थिक उन्नति में आने वाली कठिनाइयों के संबंध में भी तथ्य एवं सुझाव प्राप्त किए गए। बैठक का एक महत्वपूर्ण विषय स्थानीय स्तर पर पिछड़ा वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व एवं भागीदारी का रहा। आयोग ने जनप्रतिनिधियों से ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत स्तर पर पिछड़ा वर्ग के लोगों की राजनीतिक भागीदारी तथा निर्वाचित प्रतिनिधियों के रूप में उनके प्रतिनिधित्व की स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त की। आयोग के माननीय सदस्यगण द्वारा जनप्रतिनिधियों से केवल आंकड़ों की जानकारी ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर के अनुभव एवं सुझाव भी प्राप्त किए गए।
विभिन्न जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में पिछड़ा वर्ग की स्थिति, उनकी समस्याओं, विकास की आवश्यकताओं तथा स्थानीय स्तर पर उनके सामाजिक एवं राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव आयोग के समक्ष रखे। विशेष रूप से स्थानीय ग्रामीण निकाय चुनावों में पिछड़ा वर्ग के आरक्षण से संबंधित विषयों पर जनप्रतिनिधियों के सुझाव एवं क्षेत्रीय अनुभव आयोग द्वारा गंभीरता से सुने गए। उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में पिछड़ा वर्ग की स्थिति का जमीनी एवं तथ्यपरक अध्ययन किया जा रहा है। इसके अंतर्गत जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के माध्यम से पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या, सामाजिक स्थिति, शैक्षिक स्थिति, आर्थिक स्थिति, मूलभूत सुविधाओं तक पहुंच तथा स्थानीय निकायों में राजनीतिक प्रतिनिधित्व से संबंधित विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है।
बैठक में प्राप्त जानकारी एवं सुझाव आयोग के अध्ययन में महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेंगे तथा आगामी स्थानीय ग्रामीण निकाय चुनावों में पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के संबंध में आयोग द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली रिपोर्ट/सुझाव एवं अनुशंसा के लिए उपयोगी होंगे। बैठक के अंत में आयोग के माननीय सदस्यगण ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराई गई महत्वपूर्ण जानकारी एवं सुझावों के लिए आभार व्यक्त किया। जिलाधिकारी द्वारा आयोग के माननीय सदस्य गणों का आभार व्यक्त किया गया। इस मौके पर जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार तिवारी,आयोग के ओएसडी एम0ए0 अंसारी, जिला पंचायत राज अधिकारी विकास पटेल, जिला पंचायत एएमए सहित सम्बन्धित अधिकारीगण आदि उपस्थित रहे। इसी प्रकार ब्लॉक अकबरपुर में भी माननीय आयोग द्वारा बैठक कर आवश्यक जानकारी/ सुझाव प्राप्त किए गए।
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