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यूपी शिक्षक ट्रांसफर: कनिष्ठ शिक्षकों के रहते वरिष्ठ नहीं होंगे सरप्लस, बीएसए आशीष कुमार पाण्डेय ने कहा- निर्देशों का होगा अक्षरशः पालन

कानपुर देहात में पारदर्शी तरीके से होगा आपत्तियों का निस्तारण, बीएसए आशीष कुमार पाण्डेय ने दिए निर्देश।

राजेश कटियार, लखनऊ/कानपुर देहात। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद ने परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों के सरप्लस (अतिशेष) निर्धारण और समायोजन को लेकर सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं।

सचिव सुरेंद्र कुमार तिवारी द्वारा जारी पत्र के अनुसार सौरभ कुमार सिंह व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में कोर्ट के फैसले के तहत किसी भी सीनियर शिक्षक को तब तक सरप्लस घोषित नहीं किया जाएगा जब तक कि उस स्कूल में पिछले 5 वर्षों के भीतर नियुक्त कोई जूनियर शिक्षक मौजूद हो हालांकि, इस नियम से म्यूचुअल ट्रांसफर, मेडिकल ग्राउंड और दिव्यांगता श्रेणी के तहत आए शिक्षकों को बाहर रखा गया है।

इसके अलावा लंबे समय से तैनात शिक्षकों के मामले में वरिष्ठता (फर्स्ट कम, फर्स्ट सर्व) के नियम का सख्ती से पालन करने को कहा गया है। सचिव ने सभी बीएसए को आदेश दिया है कि पिछले 5 वर्षों में नियुक्त ऐसे शिक्षकों की आपत्तियों को सूचीबद्ध कर, निर्धारित प्रारूप और एक्सेल शीट के साथ 31 अगस्त 2026 तक परिषद कार्यालय को रिपोर्ट भेजें ताकि माननीय उच्च न्यायालय के आदेशानुसार आगे की कार्यवाही पूरी की जा सके।

मामले में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आशीष कुमार पाण्डेय ने बताया कि उच्च न्यायालय और परिषद के निर्देशों का जनपद में अक्षरशः पालन सुनिश्चित कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि तय समय सीमा के भीतर सभी ब्लॉकों से जूनियर व सीनियर शिक्षकों का डेटा जुटाकर और पारदर्शी तरीके से आपत्तियों का निस्तारण करते हुए 31 अगस्त तक रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी ताकि माननीय न्यायालय के आदेशानुसार आगे की विधिक कार्यवाही समय से पूरी की जा सके।

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