कानपुर देहात हत्याकांड: SP का दावा- ‘जल्द गिरफ्त में होंगे कातिल’, पर सबूत अब भी रहस्य
जनपद के गजनेर थाना क्षेत्र में दीपावली के दिन हुए गौरव हत्याकांड को लेकर जनपद पुलिस दावे तो बहुत कर रही है लेकिन अभी तक उसके हाथ कोई सफलता नहीं मिली है हालांकि जनपद की पुलिस अधीक्षक श्रद्धा नरेंद्र पांडे ने दावा किया है कि अभियुक्त पुलिस का शिकंजा बहुत नजदीक है

- कातिल जल्द पुलिस की गिरफ्त में होंगे, सबूत एकत्र कर रही है पुलिस - एसपी श्रद्धा नरेंद्र पांडेय
सुशील त्रिवेदी,कानपुर देहात। जनपद के गजनेर थाना क्षेत्र में दीपावली के दिन हुए गौरव हत्याकांड को लेकर जनपद पुलिस दावे तो बहुत कर रही है लेकिन अभी तक उसके हाथ कोई सफलता नहीं मिली है हालांकि जनपद की पुलिस अधीक्षक श्रद्धा नरेंद्र पांडे ने दावा किया है कि अभियुक्त पुलिस का शिकंजा बहुत नजदीक है। ताजा जानकारी के अनुसार अकबरपुर के सांसद देवेंद्र सिंह भोले ने भी गजनेर तथा शिवली थाने के हत्याकांड को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। जिसमें उन्होंने क्षेत्रीय सांसद को आश्वस्त किया है कि दोनों मामलों में संबंधित थानों की पुलिस खुलासे के नजदीक है और केवल सबूत इकट्ठा कर रही है। ज्ञात हो कि दीपावली के दिन जब पूरा समाज दीपक जला रहा था इस समय गौरव अवस्थी के जीवन का दीपक बुझ गया। थाना प्रभारी गजनेर ने बताया, मामले में कुछ लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। कई पहलुओं पर जांच की जा रही है, लेकिन अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सका है। जल्द ही पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा। पुलिस सूत्रों के किनारे अनुसार, प्रेम प्रसंग और रंजिश दोनों एंगल पर जांच की जा रही है। फॉरेंसिक टीम द्वारा जुटाए गए साक्ष्य फिलहाल जांच प्रयोगशाला में भेजे गए हैं।
गौरव की 30 नवंबर को शादी तय थी, लेकिन अब घर में मातम छाया है। मां बेबी देवी और नानी मुन्नी देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के लोगों में पुलिस की धीमी कार्रवाई को लेकर आक्रोश और भय दोनों देखा जा रहा है। गौरव अवस्थी, जो रनिया स्थित शराब फैक्ट्री में सुपरवाइजर थे, दिवाली की रात दोस्तों से मिलने निकले और सुबह सड़क किनारे मृत पाए गए। इसके पीछे किसी करीबी की साजिश की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। पुलिस को मौके से दो खाली कारतूस बरामद हुए थे, लेकिन हथियार, हमलावर और मकसद तीनों अब भी रहस्य बने हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर शुरुआती घंटों में कार्रवाई तेज होती, तो शायद कातिलों तक पहुंचना आसान होता। अब सवाल यह है दिवाली की रात बुझा गौरव का चिराग क्या इंसाफ की रोशनी देख पाएगा।



