जालौन के अन्नदाताओं और जल प्रहरियों के नाम रहा यह सम्मान: डीएम राजेश कुमार पाण्डेय का भावुक संदेश
बुंदेलखंड में जल क्रांति: सरकारी पैसा नहीं, जन-जुनून से बही नून नदी; डीएम ने जिलेवासियों को दिया सफलता का श्रेय

जालौन (उत्तर प्रदेश): बुंदेलखंड के सूखाग्रस्त माने जाने वाले जालौन जनपद ने जल संरक्षण के क्षेत्र में एक नई इबारत लिखी है। जिले को मिले प्रतिष्ठित सम्मान को जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि न मानते हुए, इसे पूरी तरह से जालौन की जनता, किसानों और अधिकारियों के अथक परिश्रम को समर्पित किया है।
डीएम राजेश कुमार पाण्डेय ने एक भावुक संदेश जारी करते हुए कहा कि यह पुरस्कार उन सभी “सजग जल प्रहरियों” का है जिन्होंने बिना किसी सरकारी धनराशि के, केवल जनभागीदारी के दम पर नून नदी को पुनर्जीवित कर दिखाया।
इनको दिया सफलता का श्रेय जिलाधिकारी ने इस अभियान की सफलता के लिए ग्राम प्रधानों, ब्लॉक प्रमुखों, स्थानीय निकायों, अन्नदाता किसानों, जनप्रतिनिधियों, इंडस्ट्री, होटल एसोसिएशन, स्वयंसेवी संगठनों, वृक्ष मित्रों, पुलिस और मीडिया कर्मियों का विशेष आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन अधिकारियों और कर्मचारियों का भी है जिन्होंने दिन-रात एक कर इस मिशन को सफल बनाया।
जालौन मॉडल: आंकड़े जो गवाही देते हैं जिलाधिकारी ने बताया कि जालौन में जल संरक्षण का कार्य केवल कागजों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धरातल पर क्रांतिकारी बदलाव आए हैं:
नून नदी का पुनर्जीवन: बिना सरकारी बजट के, केवल जन सहयोग से सूखी नदी में फिर से जान फूंकी गई।
ऐतिहासिक रिकॉर्ड: जिले में एक ही दिन में 1,850 ‘पानी की पाठशालाएं’ आयोजित की गईं।
जन शपथ: एक साथ 7,50,000 लोगों ने जल संरक्षण की शपथ ली।
इंफ्रास्ट्रक्चर: हजारों की संख्या में खेतों में मेड़बंदी, चेक डैम और रूफ टॉप रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का निर्माण किया गया।
वाटर बजटिंग: ग्राम पंचायतों में वाटर बजटिंग प्रणाली लागू कर इसे जीपीडीपी (GPDP) का अहम हिस्सा बनाया गया।
डीएम राजेश कुमार पाण्डेय ने अंत में सभी जनपदवासियों को बधाई देते हुए कहा, “यह पुरस्कार आपकी वैज्ञानिक सोच और एकजुटता का परिणाम है। यह आप सभी को समर्पित है।”



