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शिक्षकों का वेतन रोकने की मनमानी पर शासन ने लगाई रोक

महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने सभी बीएसए को दिए सख्त निर्देश, वेतन रोकना विधिक दंड की श्रेणी में नहीं

लखनऊ, अमन यात्रा लाइव: Basic Shiksha के अंतर्गत परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों और शिक्षणेतर कर्मचारियों का छोटी-छोटी त्रुटियों पर वेतन रोकने की विभागीय मनमानी पर शासन ने पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने प्रदेश के सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को कड़े दिशा-निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक अनुशासन एवं अपील नियमावली तथा बेसिक शिक्षा परिषद नियमावली में वेतन अवरुद्ध करने का कोई विधिक प्रावधान नहीं है। उच्च न्यायालय के विभिन्न न्यायिक निर्णयों का संज्ञान लेते हुए शासन ने दो टूक चेतावनी दी है कि नियमों की अनदेखी कर अवैध रूप से वेतन रोकने वाले दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक कदम उठाए जाएंगे।
विभागीय आदेश के अनुसार अब किसी भी शिक्षक या कर्मचारी के विरुद्ध निलंबन अथवा अनुशासनात्मक कार्रवाई केवल कार्मिक विभाग द्वारा निर्धारित वैधानिक प्रपत्रों और तय प्रक्रिया के अनुसार ही संपादित की जा सकेगी। व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से शुरू की गई किसी भी अनुशासनात्मक कार्यवाही, जांच आख्या और सक्षम स्तर से पारित अंतिम आदेश का संपूर्ण विवरण मानव संपदा पोर्टल पर अनिवार्य रूप से दर्ज करना होगा। बिना किसी ठोस विधिक आधार अथवा बिना विधिवत आरोप पत्र दिए शिक्षकों का वेतन बाधित करने की प्रवृत्ति पर रोक लगाते हुए शासन ने सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को तय सेवा नियमावली के दायरे में ही कार्य करने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासनिक सुधारों के तहत यह भी सुनिश्चित किया गया है कि परिषदीय विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को बाधित करने या नियमों के विपरीत आदेश जारी करने की स्थिति में जवाबदेही सीधे संबंधित अधिकारी की होगी। यदि कोई अधिकारी नियमों की अवहेलना कर स्वेच्छाचारिता बरतता है अथवा फर्जी अभिलेखों या दुर्भावनापूर्ण आधार पर कार्रवाई करता है, तो उसके विरुद्ध भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की सुसंगत प्रक्रियाओं के तहत विभागीय जांच संस्थित की जाएगी। इसके अतिरिक्त पदीय अधिकारों के दुरुपयोग अथवा शासकीय निर्देशों की जानबूझकर की गई अवहेलना के मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के लोक सेवकों के आचरण से जुड़े सुसंगत प्राविधानों के अंतर्गत विधिक व दंडात्मक संज्ञान लिया जाएगा।

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