स्पेशल टीईटी से शिक्षामित्र बाहर: चयन आयोग ने आवेदन से किया इनकार, 4 अक्टूबर अंतिम तिथि
आयोग के उप सचिव संजय का स्पष्ट बयान- नहीं है कोई आदेश, जनप्रतिनिधियों की मांग के बाद भी नहीं मिली राहत
कानपुर देहात। बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय विद्यालयों में बिना टीईटी के कार्यरत शिक्षकों को पात्रता हासिल करने के लिए पहली बार आयोजित की जा रही special tet shikshamitra संवर्ग के लिए पूरी तरह बंद कर दी गई है। राज्य शिक्षा सेवा चयन आयोग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि इस विशेष परीक्षा में शिक्षामित्रों को आवेदन करने की कोई अनुमति नहीं है। आयोग के इस रुख से लंबे समय से पात्रता पूरी करने की उम्मीद लगाए बैठे प्रदेश भर के शिक्षामित्रों को बड़ा झटका लगा है।
उप सचिव का दो टूक बयान: शामिल करने का आदेश नहीं
उत्तर प्रदेश राज्य शिक्षा सेवा चयन आयोग के उप सचिव संजय ने बताया कि स्पेशल टीईटी केवल परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के लिए आयोजित की जा रही है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि शिक्षामित्रों को इस विशेष पात्रता परीक्षा में शामिल करने का शासन स्तर से कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। उल्लेखनीय है कि शिक्षकों के लिए स्पेशल टीईटी में ऑनलाइन आवेदन जमा करने की अंतिम समय सीमा 4 अक्टूबर निर्धारित की गई है।
प्रदेश के 73 हजार शिक्षामित्रों की उम्मीदों पर फिरा पानी
आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में वर्तमान में करीब 1.43 लाख शिक्षामित्र अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से लगभग 70 हजार शिक्षामित्र पूर्व में ही यूपीटीईटी अथवा सीटीईटी उत्तीर्ण कर चुके हैं, जबकि करीब 73 हजार शिक्षामित्र अब भी टीईटी उत्तीर्ण नहीं हैं। स्पेशल टीईटी की घोषणा होते ही यह शिक्षामित्र भी परीक्षा में सम्मिलित किए जाने की मांग लगातार उठा रहे थे, ताकि वे भी अपनी अनिवार्य पात्रता पूरी कर सकें।
जनप्रतिनिधियों की पैरवी भी नहीं आई काम
इस मुद्दे को लेकर विधान परिषद सदस्य डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह और एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह सहित कई प्रमुख जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर शिक्षामित्रों को विशेष टीईटी में अवसर देने की मांग की थी। एमएलसी डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह ने अपने पत्र में तर्क दिया था कि जब अन्य शिक्षकों, सीडब्ल्यूएसएन (दिव्यांग बच्चों के शिक्षक) और एजुकेटर्स को परीक्षा में बैठने की छूट दी जा रही है, तो दो दशकों से शिक्षण कार्य में जुटे शिक्षामित्रों को वंचित करना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने विभागीय स्तर पर संशोधन की अपील की थी, किंतु आयोग के वर्तमान रुख से special tet shikshamitra पर संशय के बादल छंट गए हैं और उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।



