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फैक्ट चेक: क्या ₹2000 से ऊपर के यूपीआई भुगतान पर लगेगा 0.5% चार्ज?
वायरल गजट नोटिफिकेशन का दावा निकला भ्रामक, आम उपभोक्ताओं के लिए लेन-देन रहेगा मुफ्त

नई दिल्ली, अमन यात्रा लाइव : Digital Transactions को लेकर सोशल मीडिया पर एक सरकारी गजट का हवाला देते हुए तेजी से दावा किया जा रहा है कि ₹2000 से अधिक के हर यूपीआई भुगतान पर आम जनता को 0.5% अतिरिक्त शुल्क चुकाना होगा। वायरल पोस्ट्स में भ्रम फैलाया जा रहा है कि अब ₹5000 की खरीदारी पर ₹25 और ₹10000 के भुगतान पर ₹50 कटेंगे, लेकिन ‘अमन यात्रा लाइव’ की पड़ताल में यह दावा पूरी तरह भ्रामक और गलत पाया गया है। केंद्र सरकार या रिजर्व बैंक की ओर से आम उपभोक्ताओं पर यूपीआई ट्रांसफर के लिए ऐसा कोई नया शुल्क नहीं लगाया गया है।
वायरल हो रही राजपत्र अधिसूचना 14 सितंबर 2026 को वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाएं विभाग द्वारा जारी की गई थी। इस गजट में ‘भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007’ की धारा 10A का उल्लेख है, जो स्पष्ट करती है कि रुपे डेबिट कार्ड और ₹2000 तक के यूपीआई ट्रांजेक्शन पर कोई भी बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर किसी प्रकार का मर्चेंट डिस्काउंट रेट या शुल्क नहीं वसूल सकता। इस अधिसूचना का मूल उद्देश्य छोटे डिजिटल लेन-देन को व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए पूरी तरह शुल्क-मुक्त रखना है, न कि जनता पर कोई नया कर या चार्ज थोपना।
पड़ताल में स्पष्ट हुआ कि सरकारी गजट में 0.5% चार्ज या किसी अन्य निर्धारित प्रतिशत की कोई चर्चा नहीं है। आम नागरिकों के लिए एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में किया जाने वाला सामान्य यूपीआई भुगतान पहले की तरह पूरी तरह निःशुल्क रहेगा। यदि भविष्य में बड़े व्यावसायिक लेन-देन के लिए मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू भी होता है, तो वह बैंकों और व्यापारियों के बीच की व्यवस्था होगी, जिसका भार आम ग्राहक पर नहीं पड़ेगा। अतः इस भ्रामक खबर को सोशल मीडिया पर दुर्भावनापूर्ण तरीके से फैलाकर जनसामान्य में आर्थिक असुरक्षा पैदा करने वालों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत विधिक कार्रवाई का आधार बनता है।



