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कानपुर देहात: बीआरसी अकबरपुर में पांच दिवसीय एफएलएन प्रशिक्षण के अंतिम बैच का हुआ समापन

बीआरसी अकबरपुर में आयोजित पांच दिवसीय एफएलएन प्रशिक्षण के अंतिम बैच का सफलतापूर्वक समापन हुआ।

राजेश कटियार, कानपुर देहात। बीआरसी अकबरपुर में आयोजित पांच दिवसीय एफएलएन प्रशिक्षण के अंतिम बैच का सफलतापूर्वक समापन हुआ। बीआरसी स्तर पर आयोजित प्रशिक्षण के विभिन्न बैचों में कुल 600 अध्यापकों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया जिसका यह अंतिम बैच था। प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को बुनियादी साक्षरता एवं संख्याज्ञान के प्रभावी शिक्षण के साथ-साथ बाल-केंद्रित एवं गतिविधि आधारित शिक्षण की नवीन विधियों से परिचित कराना रहा।

​प्रशिक्षण में स्कूल शिक्षा 2023 में समाहित बाल-केंद्रित शिक्षा के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की गई। शिक्षकों को बताया गया कि प्रभावी शिक्षण प्रक्रिया में बच्चे की रुचि, जिज्ञासा, अनुभव, क्षमता एवं आवश्यकताओं को केंद्र में रखना आवश्यक है। बच्चों को केवल पाठ्यपुस्तक तक सीमित न रखकर संवाद, गतिविधि, समूह कार्य, खेल एवं अनुभवों के माध्यम से सीखने के अवसर प्रदान किए जाने चाहिए।

प्रशिक्षण के दौरान एनसीईआरटी द्वारा कक्षा-4 के लिए विकसित पाठ्यपुस्तकों के प्रभावी उपयोग एवं शिक्षण तकनीकों पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया। शिक्षकों को भाषा की पुस्तक वीणा, गणित की पुस्तक गणित मेला तथा अंग्रेजी की पाठ्यपुस्तक संतूर के माध्यम से शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को सरल, सहज, रुचिकर एवं बाल-अनुकूल बनाने की रणनीतियों से अवगत कराया गया। ​

भाषा शिक्षण में सुनने, बोलने, पढ़ने एवं लिखने तथा गणित में दैनिक जीवन के अनुभवों से जोड़कर संख्याज्ञान, तार्किक चिंतन एवं समस्या समाधान की अवधारणाओं को समझाने की गतिविधियों का अभ्यास कराया गया। वहीं अंग्रेजी शिक्षण में श्रवण एवं मौखिक अभिव्यक्ति, शब्द पहचान, उच्चारण तथा गतिविधि आधारित भाषा अधिगम पर चर्चा की गई।

​समापन अवसर पर खण्ड शिक्षा अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने कहा कि प्रशिक्षण की सार्थकता तभी है जब प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान एवं कौशल का प्रभाव विद्यालयों के कक्षा-कक्षों में दिखाई दे। उन्होंने प्रशिक्षण को जमीनी स्तर तक ले जाने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि शिक्षक प्रशिक्षण में सीखी गई गतिविधियों एवं बाल-केंद्रित शिक्षण विधियों को नियमित कक्षा-शिक्षण में लागू करें, जिससे इसका प्रत्यक्ष लाभ बच्चों को मिल सके।

​उन्होंने शिक्षकों से प्रत्येक बच्चे की सीखने की गति, रुचि एवं आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए शिक्षण प्रक्रिया को अधिक सहभागी एवं आनंददायी बनाने का आह्वान किया। ​समापन अवसर पर प्रशिक्षु शिक्षकों से प्रशिक्षण के संबंध में प्रतिक्रिया भी ली गई। शिक्षकों से प्रशिक्षण की उपयोगिता, विषय-वस्तु की प्रासंगिकता, गतिविधियों की प्रभावशीलता तथा विद्यालय स्तर पर प्रशिक्षण के अनुप्रयोग से संबंधित सुझाव प्राप्त किए गए।

प्रशिक्षु शिक्षकों ने प्रशिक्षण को उपयोगी एवं व्यावहारिक बताते हुए कहा कि इससे उन्हें बाल-केंद्रित एवं गतिविधि आधारित शिक्षण को कक्षा-कक्ष में प्रभावी रूप से लागू करने में सहायता मिलेगी। ​पांच दिवसीय प्रशिक्षण के अंतिम बैच में प्रशिक्षण दाता महाराज सिंह, ज्ञान बाबू, अमित तिवारी, आभा अवस्थी एवं निधि श्रीवास्तव द्वारा विभिन्न विषयों एवं शिक्षण विधियों पर प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के दौरान समूह चर्चा, गतिविधियां, व्यावहारिक अभ्यास, प्रश्नोत्तर एवं अनुभव साझा करने के माध्यम से शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की गई।

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