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बिदखुरी विद्यालय में मिशन शक्ति चौपाल में बालिकाओं एवं महिलाओं को पढ़ाया गया जागरूकता का पाठ

बच्चों के सामने बोले गए शब्द उनके भविष्य की दिशा तय करते है। अतःमिशन शक्ति तब सफल होगा जब हर पुरुष अपनी बोली में मर्यादा और अपने व्यवहार में संवेदना लाए

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  • पुरुष अपनी बोली में मर्यादा और व्यवहार में संवेदना लाएं __जितेन्द्र प्रताप चौहान

कानपुर देहात। बच्चों के सामने बोले गए शब्द उनके भविष्य की दिशा तय करते है। अतः मिशन शक्ति तब सफल होगा जब हर पुरुष अपनी बोली में मर्यादा और अपने व्यवहार में संवेदना लाए।यह बात सिविल बार एसोसिएशन अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता जितेन्द्र प्रताप सिंह चौहान ने मिशन शक्ति के तहत सवलियन विद्यालय विदखुरी क्षेत्र मलासा में गावों कस्बों रिश्तों में अपमानजनक मजाक भरे संबोधन से बच्चों पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव पर आयोजित गोष्ठी में कही।उन्होंने कहा कि आज गाँवों और कस्बों में रिश्तों के बीच की भाषा विकृत हो रही है। गालियाँ, अशोभनीय मज़ाक और स्त्री के प्रति तुच्छ व्यंग्य सामान्य व्यवहार बनते जा रहे हैं। यह केवल असंस्कृति नहीं, बल्कि संवेदनशीलता की मृत्यु है।भाभी, मामी, चाची, मां बहन जैसे पवित्र रिश्तों को मज़ाक का विषय बनाना समाज की जड़ों को काटने जैसा है। हास्य वहीं तक सुंदर है जहाँ किसी की गरिमा आहत न हो। जितेन्द्र चौहान ने कहा कि समाज में शालीनता और संवेदना तभी आएगी जब हम अपने गाँवों, परिवारों और रिश्तों की भाषा में सुधार लाएँगे।उन्होंने यह भी कहा कि कानून की धाराएँ तभी प्रभावी होती हैं जब समाज अपने नैतिक उत्तरदायित्व को समझे।श्री चौहान ने कहा कि “घर की भाषा और विद्यालय का वातावरण मिलकर ही एक सशक्त समाज गढ़ते हैं।” इसलिए हमें यह समझना होगा कि,”संस्कार की शुरुआत घर की बोली से होती है।” बच्चे वही बोलते हैं जो वे सुनते हैं। कहा कि हर शिक्षक को जीवन-पाठ का अध्यापक बनना चाहिए, और हर अभिभावक को केवल पालक नहीं बल्कि संस्कारों का रक्षक होना चाहिए। भाषा और सम्बोधन में सुचिता पर शिक्षकों और अभिभावक की भूमिका पर कहा कि बचपन को संस्कार, सम्मान और सुरक्षा देना ही सच्ची साधना है। बच्चा केवल परिवार का नहीं, समाज का भविष्य है। शिक्षक यदि ज्ञान के दीपक हैं तो अभिभावक उसकी लौ को दिशा देने वाले हैं।

संदलपुर साधन सहकारी समिति अध्यक्ष विनोद कटियार ने कहा कि बच्चों की शिक्षा तभी सार्थक है जब उनके भीतर मर्यादा और संयम के संस्कार जागें। शिक्षक केवल ज्ञानदाता नहीं, बल्कि चरित्र निर्माता हैं। अभिभावक केवल पालनकर्ता नहीं, बल्कि संस्कार के प्रथम शिक्षक हैं।

एआरपी अश्वनी कटियार ने कहा कि कौन-सा स्पर्श स्नेह का है और कौन-सा शोषण का। यह शिक्षा केवल पुस्तकों की नहीं, संवेदना और सजगता की पाठशाला में दी जानी चाहिए।उन्होंने इस सम्बन्ध में एक वीडियो मोबाइल से बच्चों को दिखा कर सन्देश दिया।

 

कार्यक्रम की रूपरेखा संयोजन और संचालन शिक्षामित्र संघ अध्यक्ष महेन्द्र पाल सिंह ने किया

 

इस अवसर पर मिशन शक्ति अभियान को गति देने के लिए समाजसेवी महिलाओं को मिशन शक्ति वॉलंटियर टीम गठित की गई जिसमें स्वप्रेरित रूप से आदेश कुमारी, रीना देवी, रेनू, सरिता, नायक, रिंकी नायक, सरोज ने अभियान को गति देने की जिम्मेदारी ली।

इसके साथ ही विद्यालय बालिका समिति समिति की पदाधिकारी 5 छात्राएं नामित करके उनको ताज पहनाया गया तथा उनको मिशन शक्ति के माध्यम से अन्य बच्चों को जागरूक करने की जिम्मेदारी दी गई । इनमें सृष्टि, पलक, शिवानी, सुरभि और तान्या थी।

प्रमुख रूप से मुकेश गुप्ता जिला अध्यक्ष सचिव संघ, अखिलेश सिंह अध्यक्ष सहकारी संघ झीझक, बंदना सचान अध्यक्ष अलंकृत जनकल्याण सेवा समिति, जनमेजय सिंह एडवोकेट , मीना दीक्षित जिला सह संयोजक स्वदेशी जागरण मंच, आदेश कुमारीजिला मीडिया प्रभारी,गोविंद पाल प्रधान ततारपुर, अर्जुन सिंह टी एन टी महासभा मंडल अध्यक्ष,गीता यादव प्रधानाध्यापिका, कल्पना मिश्रा, रिंकी देवी, रोली देवी , प्रतीक्षा, आकांक्षा, अरुणा देवी, पायल, शिवानी, पलक, आदि थे

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Author: anas quraishi

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