रायरामापुर में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन बही भक्ति की रसधारा
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग सुन श्रद्धालु हुए भावविभोर

पुखरायां।कानपुर देहात के भोगनीपुर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत रायरामापुर गांव में बीते तीन अप्रैल से चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथा दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव प्रसंग को समर्पित रहा।इस अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।कानपुर देहात के सूरजपुर के सरस कथावाचक आचार्य पंडित श्यामनारायण तिवारी ने श्रीकृष्ण के जन्म प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया।उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन को संघर्ष की प्रेरणादायक मिशाल बताया।कथावाचक ने अपने प्रसंग में बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म कारागार में हुआ था।उनका पालन पोषण माता देवकी से दूर यशोदा के आंचल में हुआ और उन्होंने जीवन भर कई संघर्षों का सामना किया।उन्होंने कहा कि यह प्रसंग सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियां भी व्यक्ति को महान बना सकती हैं।कथा के दौरान सृष्टि निर्माण,भगवान की लीलाओं और भक्तों पर उनकी करुणा का भी चित्रण किया गया।कथावाचक ने श्रीमद्भागवत कथा को जीवन जीने की कला सीखने वाला एक दिव्य ग्रंथ बताया।उन्होंने कहा कि यह ग्रन्थ भक्ति,सत्संग और सदाचार का मार्ग प्रशस्त करता है।कथावाचक आचार्य पंडित श्यामनारायण तिवारी ने कहा कि जब कंस का अत्याचार बहुत बढ़ गया तो भगवान विष्णु कारागार में बंद देवकी के आठवें गर्भ के रूप में प्रगट हुए।उन्हें महामाया के प्रभाव से वासुदेव ने रातोंरात नंदगांव पहुंचा दिया।भगवान श्रीकृष्ण जन्म लेने लेने के बाद से ही अलौकिक लीलाएं दिखाने लगे।भगवान का जन्म होते ही पांडाल जयकारों से गुंजायमान हो उठा।कथा के दौरान एक उम्मीद जन कल्याण सेवा समिति टीम के जिला उपाध्यक्ष शिक्षक महेंद्र पाल,समाजसेविका आदेश कुमारी नायक,समाजसेवी बलदेव नायक,अर्जुन सिंह नायक मंडल अध्यक्ष डीएनटी महासभा इत्यादि ने व्यासपीठ का पूजन कर कथावाचक का अंगवस्त्र भेंटकर सम्मान किया एवं उनका आशीर्वाद लिया।उन्होंने कहा कि भागवत कथा समाज में प्रेम,शांति और संस्कारों का संदेश फैलाती है।आयोजकों और ग्रामीणों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज को एकजुट करते हैं और युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ते हैं।इस मौके पर जजमान श्रीमती शोभा तिवारी एवं रघुवीर तिवारी,आयोजक मंडल के सोनी तिवारी,आलोक तिवारी,निधि,सिधी,अंशु पांडेय,विशाल पांडेय,विनोद पांडेय, सौरभ पांडेय, शिवांशु पांडेय,शशांक पांडेय,अरविंद पाल,रामनाथ पाल,शंकर पाल,बाबूजी सविता,वीरेंद्र पाल समेत सैकड़ों की तादात में ग्रामवासी व क्षेत्रवासी मौजूद रहे।



