सीएम योगी का ‘मेगा प्लान’: कानपुर, मेरठ और मथुरा की बदलेगी तस्वीर, ‘ग्रेटर कानपुर’ और रिवरफ्रंट समेत 478 परियोजनाओं को हरी झंडी
अयोध्या-काशी की तर्ज पर होगा विकास, कानपुर के लिए 'रूटेड इन लेगेसी, राइजिंग टू टुमॉरो' की थीम तय
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के तीन प्रमुख शहरों—कानपुर, मेरठ और मथुरा-वृंदावन—के कायाकल्प के लिए एक ऐतिहासिक रोडमैप तैयार कर लिया है। बुधवार को लखनऊ स्थित सरकारी आवास पर हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में सीएम योगी ने स्पष्ट कर दिया कि अब इन शहरों का विकास केवल सड़कों और इमारतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यहां की संस्कृति, इतिहास और आधुनिकता का एक बेहतरीन संगम देखने को मिलेगा।
कानपुर के लिए क्या है खास? (109 परियोजनाएं) कानपुर वासियों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी है। सीएम योगी ने कानपुर के विकास के लिए ‘रूटेड इन लेगेसी, राइजिंग टू टुमॉरो’ (विरासत से जुड़े, भविष्य की ओर बढ़ते) की थीम तय की है।
ग्रेटर कानपुर: शहर का विस्तार अब ‘ग्रेटर कानपुर’ के रूप में होगा।
प्रमुख प्रोजेक्ट्स: मैनावती मार्ग का चौड़ीकरण, ग्रीन पार्क स्टेडियम के आसपास अर्बन डिजाइन में सुधार, मकसूदाबाद में सिटी फॉरेस्ट और बॉटनिकल गार्डन का निर्माण।
कनेक्टिविटी: वीआईपी रोड, रिवरफ्रंट लिंक, ग्रीनफील्ड कॉरिडोर और मेट्रो विस्तार जैसी बड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।
मेरठ और मथुरा के लिए विजन
मेरठ (111 परियोजनाएं): लखनऊ के ग्रीन कॉरिडोर की तर्ज पर बिजली बम्बा बाईपास को पीपीपी मोड पर विकसित करने की योजना है। इसके अलावा 19 प्रमुख चौराहों का सुधार और स्मार्ट रोड नेटवर्क तैयार होगा।
मथुरा-वृंदावन (258 परियोजनाएं): ‘विजन-2030’ के तहत तीर्थनगरी को संवारा जाएगा। बरसाना-गोवर्धन-राधाकुंड कॉरिडोर का सुधार और श्रद्धालुओं के लिए वर्ल्ड क्लास सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
कुल 478 परियोजनाओं का खाका तैयार सीएम योगी को बताया गया कि जनप्रतिनिधियों और विभागों के समन्वय से कुल 478 परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार है। पहले चरण (2025-26) में तुरंत काम शुरू करने के लिए कानपुर की 13, मेरठ की 11 और मथुरा की 14 प्राथमिकता वाली परियोजनाओं को चुना गया है।
सीएम का कड़ा निर्देश: क्वालिटी से समझौता नहीं मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विकास ऐसा हो जिसमें स्थानीय पहचान दिखे। उन्होंने कहा, “नागरिकों को इन कार्यों का प्रत्यक्ष लाभ दिखना चाहिए। यदि अतिरिक्त बजट की आवश्यकता होगी तो सरकार उपलब्ध कराएगी, लेकिन गुणवत्ता और समयसीमा का पूरा ध्यान रखा जाए।”



