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सीएसजेएमयू में बच्चों को निःशुल्क स्वर्ण प्राशन कराया गया

छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट आफ हेल्थ साइंसेज में आज स्वर्ण प्राशन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 31 बच्चों को आयुर्वेदाचार्य डॉ वंदना पाठक ने निःशुल्क स्वर्ण प्राशन कराया।

Story Highlights
  • स्वर्ण प्राशन बच्चों को स्वस्थ रखने वाली वैक्सीन है: डाॅ. वंदना पाठक
कानपुर,अमन यात्रा। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट आफ हेल्थ साइंसेज में आज स्वर्ण प्राशन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 31 बच्चों को आयुर्वेदाचार्य डॉ वंदना पाठक ने निःशुल्क स्वर्ण प्राशन कराया। इस अवसर पर डॉ वंदना पाठक ने बताया कि कोविड-19 जैसी महामारियों से बचाव हेतु आयुर्वेद में बहुत सारे उपाय दिए गए हैं। स्वर्ण प्राशन इसी की एक कड़ी है। उन्होंने कहा कि स्वर्ण प्राशन बच्चों के इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है। विशेषज्ञों द्वारा यह बताया गया है कि कोविड-19 की तीसरी लहर मे स्वर्ण प्राशन ने बच्चों को कोविड-19 से बचाव में बहुत सहायता की है। ज्यादातर बच्चे इससे प्रभावित नहीं हुए। डॉ वंदना पाठक ने बताया कि स्वर्ण प्राशन 16 संस्कारों में से एक संस्कार है, जो कि बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। वर्तमान समय में स्वर्ण प्राशन एक ऐसी वैक्सीन है, जो विभिन्न रोगों से बच्चों का बचाव करती है।
स्वर्ण प्राशन ऋतु परिवर्तन होने की स्थिति में बच्चों में संक्रमण से होने वाली बीमारी से भी बचाव करता है। यदि किसी को बुखार इत्यादि कोई बीमारी होती भी है तो वह अति शीघ्र ठीक हो जाता है।
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डॉ. वंदना पाठक ने बताया कि अब बच्चों ने जंक फूड का भी विरोध करना शुरू कर दिया है, जिससे उनके माता-पिता भी प्रसन्न है। कार्यक्रम में बच्चों को एक-एक करके स्वर्ण प्राशन कराया गया, साथ ही बच्चों के माता-पिता को भी आहार-विहार, दिनचर्या एवं त्रतुचर्या विषय पर निशुल्क काउंसलिंग की गई एवं उनको भोज्य पदार्थ भी निःशुल्क प्रदान किया गया। यह स्वर्ण प्राशन स्वर्ण भस्म, वचा, गिलोय, ब्राह्मी घृत, गौघृत, मधु आदि द्रव्यों को मिलाकर कई घंटों के मिश्रण के पश्चात तैयार किया जाता है।
आयुर्वेदाचार्य डॉ वंदना पाठक ने बताया कि पुष्य नक्षत्र में स्वर्ण प्राशन ग्रहण करने का बच्चों को अत्यधिक फायदा होता है। स्वर्ण प्राशन कराने वालों में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विश्वविद्यालय के समीप निवास करने वाले अभिभावकों के बच्चे थे। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ प्रवीन कटियार, डॉ सिधांशु राय, डॉ अजय यादव, डॉ. वारसी सिंह, श्री अनुराग मिश्रा, संस्थान के विद्यार्थी एवं अन्य कर्मचारी गण उपस्थित थे।
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Author: aman yatra

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