कानपुर देहात: पिछड़ा वर्ग की सूची में कुर्मी शब्द जोड़ने की अपील
सरदार पटेल बौद्धिक विचार मंच ने उपजाति के साथ "कुर्मी" शब्द लिखने की अपील की।

राजेश कटियार, कानपुर देहात। 2027 में होने वाली संभावित जातीय जनगणना के मद्देनजर कुर्मी समाज अपनी सही गिनती को लेकर सजग हो गया है। विभिन्न मंचों पर कुर्मी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा यह अपील की जा रही है कि उपजाति में फॉर्म भरते समय “कुर्मी” शब्द का स्पष्ट उल्लेख अवश्य करें। सरदार पटेल बौद्धिक विचार मंच के महामंत्री जगदीश शरण गंगवार ने बताया कि मंच सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति, सेवानिवृत्त कुलपति, उच्च प्रशासनिक / पुलिस / सेना के अधिकारियों, प्रोफेसर, वैज्ञानिक, आभियन्ताओं, शिक्षकों, चिकित्सकों, अधिवक्ताओं, व्यवसायियों एवं समाज सेवियों का एक गैर-राजनैतिक संगठन है जो समाज की भावनाओं एवं समस्याओं से समय समय पर सरकार एवं निर्णयकर्ताओं का ध्यान आकर्षित करता रहता है एवं उनके क्रियान्वयन हेतु प्रयास करता है।
सरदार पटेल बौद्धिक विचार मंच सरदार पटेल के आदर्शों / विचारधाराओं को आगे बढ़ाने का काम गत 8 वर्षों से कर रहा है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में कुर्मी समाज की जनसंख्या 12 प्रतिशत से अधिक है और पिछली लोकसभा एवं विधानसभा चुनावों में अच्छी संख्या में इस जाति के जनप्रतिनिधि चुनकर आए हैं।
यह समाज उत्तर प्रदेश की 52 लोकसभा तथा लगभग 300 विधानसभा सीटों पर जीतने अथवा जितवाने की स्थिति रखता है। गृह मंत्रालय भारत सरकार के महारजिस्ट्रार के द्वारा 22 जनवरी 2026 की जनगणना से सम्बन्धित मकान सूचीकरण तथा मकानों की गणना अनुसूचियों के माध्यम से जानकारी एकत्र करने के लिए 33 बिन्दु का एक प्रारूप जारी किया गया है। प्रारूप में क्रम संख्या 12 पर क्या परिवार का मुखिया अनुसूचित जाति /अनुसूचित जनजाति / अन्य से सम्बन्धित है में अन्य पिछड़ा वर्ग को अलग से नहीं दर्शाया गया है।
जिससे अन्य पिछड़ा वर्ग की जातियों की सही गणना नहीं हो सकेगी। समाज के सभी संगठन मांग करते रहे हैं कि अन्य पिछड़ा वर्ग की जातिवार जनगणना कराई जाये। उन्होंने कहा कि मीडिया के माध्यम से हम कुर्मी समाज के सभी लोगों से अपील करना चाहेंगे कि जाति जनगणना के समय अपनी उपजाति के साथ “कुर्मी” जाति अवश्य लिखें जिससे जातिवार जनगणना में समाज के सही आंकड़े आ सकें।
वार्ता के दौरान अरुण कुमार सिन्हा पूर्व आईएएस एवं संस्थापक संरक्षक डॉ. क्षेत्रपाल गंगवार, अध्यक्ष, रवीन्द्र सिंह गंगवार, वी.आर. वर्मा, मुनीश गंगवार, आर.एल. निरंजन, योगेन्द्र सचान, कुर्मी सभा लखनऊ से जय सिंह सचान, सरदार वल्लभभाई ट्रस्ट से श्री के.सी. वर्मा, पटेल प्रतिनिधि सभा, लखनऊ से ज्ञान सिंह एवं अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा से योगेन्द्र सचान, छत्रपति शिवाजी शोध संस्थान से राजबहादुर सिंह ने कहा कि कुर्मी समाज की ओर से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जनगणना कर्मचारी जब घर-घर आएं तो कुर्मी शब्द को स्पष्ट रूप से अंकित किया जाए ताकि राज्य और केंद्र स्तर पर उनकी सही आबादी का पता चल सके और उन्हें आरक्षण का पूरा लाभ मिल सके।


