CSAATU कानपुर में नया विवाद: डीन पर रैगिंग पीड़ित छात्र को धमकाने का आरोप
निष्पक्ष जाँच की मांग तेज: पूर्व छात्र नेता ने कार्यवाहक कुलपति/मंडलायुक्त को लिखा पत्र

कानपुर। चंद्रशेखर आज़ाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (CSAATU), कानपुर में रैगिंग से जुड़े एक मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। फॉरेस्ट्री संकाय के डीन डॉ. कौशल कुमार पर रैगिंग के शिकार हुए पीड़ित छात्र को धमकाने और अपनी शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने का गंभीर आरोप लगा है।
इस पूरे प्रकरण में अखिल भारतीय कृषि छात्र संघ (AIASA) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान एनएसयूआई छात्र नेता सौरभ सौजन्य ने हस्तक्षेप किया है। उन्होंने विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति एवं मंडलायुक्त, डॉ. के. विजयेंद्र पांडियन को एक औपचारिक पत्र लिखकर इस मामले पर तत्काल ध्यान देने और अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।
यूजीसी नियमों के उल्लंघन का आरोप
अपने पत्र में, सौरभ सौजन्य ने स्पष्ट किया है कि डीन द्वारा पीड़ित छात्र को अपने कार्यालय में बुलाकर शिकायत वापस लेने के लिए धमकाना और दबाव डालना न केवल अनैतिक है, बल्कि यह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के दिशा-निर्देशों और रैगिंग प्रतिषेध अधिनियम का भी सीधा उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थान की गरिमा के प्रतिकूल ऐसी हरकतें अस्वीकार्य हैं।
निष्पक्ष जाँच के लिए मुख्य मांगें
सौरभ सौजन्य ने मामले की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए दो प्रमुख मांगें रखी हैं:
- पद से मुक्ति: जाँच पूरी होने तक आरोपी प्रोफेसर को उनके पद से तत्काल मुक्त किया जाए ताकि वह जाँच प्रक्रिया को प्रभावित न कर सकें।
- जाँच समिति का गठन: उन्होंने सुझाव दिया है कि जाँच समिति में विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े अधिकारियों को सम्मिलित न किया जाए, जिससे जाँच पूरी तरह से स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से संपन्न हो सके।
यह देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन और मंडलायुक्त इस गंभीर आरोप पर क्या कदम उठाते हैं, जिससे रैगिंग पीड़ित छात्रों को न्याय मिल सके और शिक्षण संस्थानों में सुरक्षित वातावरण बना रहे।



