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महाबलेश्वर हनुमान मंदिर में बुढ़वा मंगल की धूम: 56 भोग के बाद सजी भव्य झांकी, भजनों पर झूमे भक्त

पुखरायां की पुरानी बस्ती में रात्रि जागरण, दूर-दराज से आए भजन गायकों ने बांधा समां

पुखरायां। नगर के पुरानी बस्ती स्थित प्रसिद्ध महाबलेश्वर हनुमान मंदिर में pukhrayan budhwa mangal पर्व श्रद्धा, उल्लास और भव्यता के साथ मनाया गया। बुढ़वा मंगल के पावन अवसर पर मंगलवार शाम मंदिर परिसर में भगवान हनुमान जी की भव्य और नयनाभिराम झांकी सजाई गई। पट खुलते ही श्रद्धालुओं के जयकारों से पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा। आयोजकों ने विधि-विधान से आरती उतारकर बजरंगबली को छप्पन भोग अर्पित किया, जिसके बाद उपस्थित जनसमूह में प्रसाद वितरण किया गया।

देर रात तक चले जागरण में बही भक्ति की अविरल धारा

pukhrayan budhwa mangal महोत्सव के उपलक्ष्य में मंगलवार की रात विशाल जागरण का आयोजन हुआ। जागरण का शुभारंभ उन्नाव से पधारी जीएस जागरण पार्टी के गायकों ने देवा हो देवा गणपति देवा से गणेश वंदना प्रस्तुत कर किया। इसके बाद लखनऊ से आए प्रख्यात गायक अंशु गोस्वामी उर्फ पागल बाबा ने हम राम जी के, राम जी हमारे हैं भजन गाकर श्रोताओं को भक्ति भाव से झूमने पर विवश कर दिया।

कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

शाहजहांपुर से आए गायक शुभम पांडेय रंगीला ने माता के चरणों की रज धूल जो मिल जाए मार्मिक भजन प्रस्तुत कर वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया। वहीं लखनऊ की भजन गायिका ज्योति गोस्वामी ने महाकाल की गुलामी मेरे काम आ रही है सुनाकर श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं। मंच संचालक व भजन गायक ज्ञानेंद्र शुक्ला ने दुनिया रचने वाले को भगवान कहते हैं और संकट हरने वाले को हनुमान कहते हैं गाकर जागरण में समां बांध दिया। जागरण पार्टी के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत की गई भगवान की सजीव झांकियों ने भी भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

बड़ी संख्या में उपस्थित रहे नगरवासी व आयोजक

कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य आयोजक अंकुर द्विवेदी, सुशील त्रिवेदी, मनीष द्विवेदी, प्रशांत मिश्रा, रिशु दीक्षित, मयंक द्विवेदी, भरतस्वरूप शर्मा, जीतू शर्मा, सुमित, शशांक द्विवेदी, राहुल दीक्षित, सजल द्विवेदी, अक्षत चतुर्वेदी, शुभ तिवारी और श्रेय तिवारी सहित नगर व आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आए सैकड़ों श्रद्धालु देर रात तक मौजूद रहे। pukhrayan budhwa mangal का यह धार्मिक अनुष्ठान क्षेत्र में भक्ति व सौहार्द का प्रमुख केंद्र बना रहा।


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