कविता

।। शहादत ।।तिरंगे की शान की खातिर

अमन यात्रा

।। शहादत ।।

  तिरंगे की शान की खातिर
और मातृभूमि की आन की खातिर
लाखों कर गए जान फिदा
देश की माटी की खातिर ।
कौन सा लहू का रिश्ता था
मात्र भूमि से
जो कर गए प्राण न्योछावर
अपने वतन की खातिर ।
ना अपने तन की फिकर ,ना घर बार की चिंता
उनका लहू जब भी खौला उबाल बन
तो सिर्फ सीमा की सुरक्षा की खातिर ।।
निस्वार्थ हो,निडर हो
वो लड़े,
आखिरी सांस तक,अपने हिमालय
अपने कश्मीर की खातिर ।
हर जाति,हर मजहब और हर धर्म
को जोड़े रखा
एकता और अहिंसा की सीख की खातिर ।।
ऐ! शहीदों तुम्हारी शहादत
यूं,व्यर्थ न जायेगी ।
आखिर! कोई तो सबक लेगा
इस शहादत के अध्याय के गहन अध्यन की खातिर ।।
मातृ भूमि के लिए जान न्योछावर करने
वालो को मेरा सत सत नमन ।
              स्नेहा कृति 
(रचनाकार) कानपुर उत्तर प्रदेश

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