उत्तर प्रदेश के एक लाख फार्मासिस्ट जुड़ेंगे डिजिटल हेल्थ नेटवर्क से, पीसीआई और एनएचए का बड़ा फैसला; बनेगी विशिष्ट डिजिटल आईडी
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत पंजीकृत फार्मासिस्टों को मिलेगा एचपीआर कार्ड, फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम; टेली-मेडिसिन और ई-फार्मेसी में खुलेंगे रोजगार के नए अवसर।

लखनऊ/कानपुर। उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को अत्याधुनिक, पारदर्शी और तकनीक-संचालित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया और नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के संयुक्त प्रयास से उत्तर प्रदेश के लगभग 1 लाख पंजीकृत फार्मासिस्टों को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के तहत डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ा जा रहा है। इस पहल के तहत फार्मासिस्टों को एबीएचए (आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता) और स्वास्थ्य पेशेवर पंजीयन (एचपीआर) में पंजीकृत कर उन्हें एक डिजिटल पहचान पत्र प्रदान किया जाएगा।
डिजिटल पहचान और एचपीआर कार्ड
सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद हर फार्मासिस्ट को एक विशिष्ट डिजिटल पहचान पत्र और एचपीआर कार्ड जारी होगा जो उनकी पेशेवर प्रामाणिकता को देश भर में मान्यता देगा। स्वास्थ्य पेशेवर पंजीयन में दर्ज आंकड़ों के कारण केवल प्रमाणित और योग्य फार्मासिस्ट ही नेटवर्क का हिस्सा बन सकेंगे जिससे अमान्य या बिना लाइसेंस वाले संचालकों पर प्रभावी अंकुश लगेगा।
पेशेवर आंकड़ों का डिजिटलीकरण
फार्मासिस्टों को अपने विवरण (प्रोफाइल) में पंजीयन क्रमांक, मोबाइल नंबर, ईमेल पता, शैक्षणिक योग्यता और कार्य अनुभव जैसी जानकारियां सटीक रूप से अद्यतन करनी होंगी।
रोजगार और आजीविका के नए अवसर
डिजिटल स्वास्थ्य नेटवर्क से जुड़ने के बाद भविष्य में दूरस्थ चिकित्सा (टेली-मेडिसिन), ई-औषधालय (ई-फार्मेसी), डिजिटल पर्चा प्रबंधन और एकीकृत स्वास्थ्य मंचों पर फार्मासिस्टों के लिए रोजगार व पेशेवर विकास के नए रास्ते खुलेंगे।
स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता
रोगियों को सही औषधियों का वितरण और दवा से जुड़ी सटीक सलाह मिलना सुनिश्चित होगा जिससे राज्य की समग्र स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की गुणवत्ता और जवाबदेही मजबूत होगी।
विशेषज्ञों की राय और अपील
कानपुर स्थित कटियार मेडिकल स्टोर के संचालक और वरिष्ठ फार्मासिस्ट राजेश कटियार ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे औषधीय क्षेत्र के लिए एक दूरगामी कदम बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के करीब 1 लाख फार्मासिस्टों को डिजिटल स्वास्थ्य नेटवर्क से जोड़ना एक ऐतिहासिक और सराहनीय पहल है।
इससे हमारी पेशेवर पहचान मजबूत होगी और हम आधुनिक स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणाली का सीधा हिस्सा बन सकेंगे। मैं उत्तर प्रदेश के सभी पंजीकृत फार्मासिस्टों से अपील करता हूं कि वे बिना किसी देरी के एचपीआर वेब पोर्टल पर अपनी जानकारी अद्यतन करें और अपनी डिजिटल आईडी प्राप्त करें। इस नई व्यवस्था के लागू होने से न केवल फार्मासिस्टों की सामाजिक और पेशेवर प्रतिष्ठा में सुधार होगा बल्कि आम जनता को भी अधिक सुरक्षित, त्वरित और विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त होंगी।



