कानपुर देहात के डेरापुर में असमय बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान, भाकियू ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
तत्काल लेखपालों को मौके पर भेजकर फसलों के नुकसान का निष्पक्ष आकलन कराया जाए।

डेरापुर, कानपुर देहात: आसमान से बरसी आफत ने डेरापुर के किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। असमय हुई मूसलाधार बारिश और भारी ओलावृष्टि के कारण खेतों में खड़ी सोना उगलती गेहूं की फसल मलबे में तब्दील हो गई है। किसानों के इस दर्द को आवाज देने के लिए भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने तहसील मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया और एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया।
खेतों में बिछ गई फसल, दाने-दाने को मोहताज हुआ किसान
तहसील अध्यक्ष कुलदीप सिंह के नेतृत्व में आयोजित किसान पंचायत में किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। किसानों ने बताया कि 15 अप्रैल को आई इस प्राकृतिक आपदा ने उनकी सालभर की जमापूंजी छीन ली है। तेज हवाओं और ओलों की मार से गेहूं की बाली टूटकर जमीन पर गिर गई है, जिससे उत्पादन शून्य होने की कगार पर है। किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही फसलों का सही आकलन कर मुआवजा नहीं दिया गया, तो ग्रामीण सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
प्रशासन से मुआवजे और बिजली कटौती की बड़ी मांग
भाकियू ने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन के सामने अपनी शर्तें रखी हैं:
निष्पक्ष सर्वे: लेखपालों की टीम तत्काल खेतों पर जाकर नुकसान का जायजा ले और बिना किसी भेदभाव के रिपोर्ट तैयार करे।
अग्नि सुरक्षा: कटाई के सीजन को देखते हुए दिन के समय बिजली की सप्लाई बंद रखी जाए ताकि शॉर्ट सर्किट से बची-कुची फसलों में आग न लगे।
खरीद गारंटी: सरकारी केंद्रों पर गेहूं की खरीद में आ रही अड़चनों को दूर किया जाए और किसानों को तत्काल भुगतान सुनिश्चित हो।
किसान पंचायत में मौजूद सैकड़ों किसानों ने एक सुर में कहा कि यह संकट की घड़ी है और सरकार को बिना देरी किए राहत पैकेज की घोषणा करनी चाहिए।
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