बाढ़ का कहर: यमुना और सेंगर नदियों ने मचाई तबाही, गांवों में घुसा पानी
राजस्थान में हो रही भारी बारिश और कोटा बांध से छोड़े गए पानी के कारण यमुना और सेंगर नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है, जिससे भोगनीपुर तहसील के कई गांवों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं।

पुखरायां – राजस्थान में हो रही भारी बारिश और कोटा बांध से छोड़े गए पानी के कारण यमुना और सेंगर नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है, जिससे भोगनीपुर तहसील के कई गांवों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। बाढ़ के पानी ने लोगों के घरों में घुसकर उनका जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। ग्रामीण पिछले पांच दिनों से लगातार मुसीबतों से जूझ रहे हैं।
40 से अधिक घरों में घुसा पानी, गांव बने ‘टापू’
मलासा विकास खंड के भरतौली और उसके मजरों में कम से कम 40 घरों में पानी घुस गया है। मूसानगर क्षेत्र के करीब बारह गांवों में यमुना और सेंगर नदी ने भारी तबाही मचाई है। चपरघटा, आढन पथार, मुसरिया, क्योंटरा, कुंभापुर, नयापुरवा, पड़ाव, धुंडा, चतुरी पुरवा, नगीना, चंदनामऊ और भरतौली जैसे गांव पूरी तरह से जलमग्न हो चुके हैं। इन गांवों के रास्तों में 10 से 12 फीट तक पानी भरा हुआ है, जिसके कारण ये गांव ‘टापू’ जैसे बन गए हैं।
आवागमन के लिए नावों का सहारा
पानी से भरे रास्तों के कारण ग्रामीणों को आवागमन के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। प्रशासन की ओर से चलाई जा रही नावों के अलावा, कई लोग निजी नावों का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं। भरतौली गांव की मुख्य सड़क पूरी तरह से डूब गई है, जिससे गांव में आना-जाना पूरी तरह बंद हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल उन्हें इस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
फसलें बर्बाद, मवेशियों के चारे का संकट
बाढ़ का सबसे बड़ा नुकसान किसानों को हुआ है। सैकड़ों बीघा फसलें बर्बाद हो गई हैं। इसके अलावा, मवेशियों के लिए चारे का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीण दूसरे गांवों से नावों के जरिए भूसा और चारा लाने को मजबूर हैं, ताकि उनके पशु भूखे न रहें।
सरकार से की मदद की गुहार
भरतौली के ग्रामीणों ने भोगनीपुर तहसील प्रशासन से मांग की है कि इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए। उन्होंने एक वैकल्पिक रास्ता बनाने की मांग की है, ताकि हर साल आने वाली बाढ़ से होने वाली परेशानी से बचा जा सके। साथ ही, उन्होंने अपनी बर्बाद हुई फसलों के लिए उचित मुआवजे की भी मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार हर साल आने वाली बाढ़ को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है, जिससे उन्हें हर बार भारी नुकसान उठाना पड़ता है।


