दिल्ली में शिक्षकों ने सरकार को दिया अल्टीमेटम, अध्यादेश लाकर टेट की अनिवार्यता रद्द करने की उठी मांग
शिक्षकों की मांग है कि केंद्र सरकार शीतकालीन सत्र में अध्यादेश लाकर टीईटी अनिवार्यता के आदेश को बदले।

राजेश कटियार,दिल्ली/कानपुर देहात। यूपी के प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों ने अनिवार्य टेट को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा की अध्यक्षता में 22 राज्यों के शिक्षक संगठनों के शिक्षकों ने हुंकार भरी और सरकार को मांग न मानने पर दिल्ली घेराव का अल्टीमेटम भी दे दिया है। शिक्षकों का कहना था कि एनसीटीई के गलत फैसले से 10 लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं।
इसमें सबसे अधिक यूपी के 1.86 लाख शिक्षक भी शामिल हैं। ऐसे में इन शिक्षकों की मांग थी कि केंद्र सरकार से शीतकालीन सत्र में अध्यादेश लाकर टेट अनिवार्य के आदेश को बदला जाए। शिक्षक संगठनों का कहना है कि वर्ष 2011 से पहले भर्ती होने वाले शिक्षकों के लिए टीईटी की कोई अनिवार्य शर्त नहीं थी। यदि होती तो वे उस समय अनिवार्य पात्रता परीक्षा पास करते। अब अचानक 2025 में शिक्षकों को टीईटी अनिवार्य का फैसला थोपा गया है जोकि नियम विरुद्ध है।
ऐसे में वे बच्चों को पढ़ाएं या फिर टेट परीक्षा की तैयारी करें। एक अनुमान के मुताबिक टीईटी लागू होने से देशभर में लगभग 10 लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। धरना प्रदर्शन में अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक बासवराज गुरिकर, सह संयोजक एवं यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) के प्रदेश अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह राठौर, प्रदेश संगठन मंत्री यादवेन्द्र शर्मा, यूटा के जिलाध्यक्ष गजेन्द्र सिंह, शिव गोविन्द, सुशील कुमार, ऋचा कटियार, रवि सचान, ऋचा पटेल, नानक चंद्र, संदीप कुमार सहित जनपद कानपुर देहात से सैंकड़ो की संख्या में शिक्षकों ने प्रभावी प्रतिभागिता कर अपनी आवाज को बुलन्द किया।



